हे माता !  सबका कल्याण व मंगल हो।

 !! नवरात्रि पूजन !! नौ रूपों में पूजी जाती हो, शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा कहलाती हो, शैलपुत्री कुष्मांडा माँ भगवती तेरा नाम है, तुझसे ही सृष्टि सर्व गतिमान है। अश्विन चैत्र मास में आती हो, भक्तों पर दया दृष्टि कर जाती हो, तेरी महिमा का क्या गुणगान करूँ, नौ रूपों में पूजी जाती हो। लाल…

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राहगीर…….

कुछ राह चले हैं मैंने कुछ चलना अभी बाक़ी है , मैं एक राहगीर हूं अभी मेरा सफ़र जारी है,, कभी ढलती शाम कहीं तो कहीं सुबह की लाली है हर रोज़ उम्मीद की किरण लिए अभी कुछ भटकना बाकी है मैं एक राहगीर हूं अभी मेरा सफ़र जारी है,, अभी कुछ करना है कुछ…

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खेती……..

बड़ा मुश्किल हे भईया करना आजकल खेती जोन करत हे करत हे अपन सेती ,, दवाई दारू के कीमत भारी लागत लग जावत हे सारी नागर बक्खर रापा कुदारी जोताई फंदाई आरी पारी फेर किसान के जमत नई हे नेति , बड़ा मुश्किल हे भईया करना आजकल खेती जोन करत हे करत हे अपन सेती,,…

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,,,,,,,, फ़ौज,,,,,,,

  बेटा मेरा गया है फ़ौज में     देशभक्ति लिए अपनी सोच में , कुछ वतन का फर्ज़          कुछ मिट्टी का कर्ज़ मस्तमौला वो              अपनी ही मौज में ,,  बेटा मेरा गया फ़ौज में,,       देश भक्ति लिए अपनी सोच में,, क्या…

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ज़िन्दगी  बचपन से आज तक ना जाने कितने ख़्बाव देखें मैंने…..

  ज़िन्दगी बचपन से आज तक ना जाने कितने ख़्बाव देखें मैंने, कुछ खट्टे कुछ मीठे, कुछ धुंधली तो कुछ स्पष्ट, कुछ उभरे कुछ अंधेरे में सिमटे। हर तरफ़ हैं बेबसी, ग़रीबी ये कैसी ज़िंदगी, ना ख़्बाव है ना कोई ख़ुशी ॥ ईश्वर की मार , करमों का वार, ख़ाली पेट में टकराव, किश्त में…

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जंगल……

अपनी जरूरतों के लिए तूने मुझे टुकड़ों में बांट दिया मेरी हरियाली को तबाह कर         तुमने मुझे काट दिया,, मैंने तो तुझे हमेशा देना चाहा   मीठे फल दिए शीतल छांव दिया , पर तुम बन के हैवान       मुझे बंजर घाव दिया ,, मिट्टी सड़ाई पानी भी दूषित…

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पतझड़………

पतझड़ होने का,पेड़ों का अपना ही मज़ा होता है,              कुछ बोझ गिर जाते हैं, सूखे पत्ते बन कर,, नए उमंगे लाते हैं, नए नए पत्ते जमकर,, दोपहर की गर्म हवाएं, काली पड़ती तन जलकर,, शाम रोशनी की छटाएं, लौट चलती जैसे रथ दिनकर,, सूखे डंठल पेड़ो की, सुखी सुखी…

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भावाँजलि….

  पवन नही यह आँधी है, छत्तीसगढ का गाँधी है। हाँ यही नारा लगा था तब, जेल मंत्री बन आए जब। सिंह सी थी चाल मतवाली, मुक्त-हँसी जिसकी निराली। काठ का पहने चरण -पादुका, तन पर ओढ़े वस्त्र -गेरुआ। माथे पर था तेज टपकता, वाणी में थी ओज प्रखरता। निपुण- नेता कवि -ओजस्वी, भागवत -कर्ता…

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सामाजिक बंधुओ के हितों के लिए सदैव प्रयासरत रहूंगा:डॉ. विनय शंकर।

सामाजिक संस्था राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच के नये प्रदेश अध्यक्ष होंगे डॉ. सिंह। सुरेन्द्र मिनोचा एमसीबी :- पेशे से चिकित्सक और जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ के अध्यक्ष डॉ. विनय शंकर सिंह को सामाजिक संस्था राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच नई दिल्ली द्वारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया…

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सुख मिलथे—

कोनो कहिथे सुख मिले,मोटर बंगला कार म| कोनों कहे सुख मिले,नौकरी अऊ व्यापार म|| कंजूस कहे सुख मिलथे,धन,दौलत नोट म| नेता कहिथे सुख मिलथे,जनता के वोट म|| परोसी कहे सुख मिलथे,चारी चुगरी गोठ म| कपटी ल सुख मिले,पीठ पाछु मारे चोट म|| सुख के कई पैमाना हे,अपन अपन विचार म- कोनो ल सुख मिलथे,जवानी के…

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