पढ़िए कविता, “रख अपने हौसलों मे दम”…
रख अपने हौसलों मे दम मिले खुद के कर्म से गम इसलिए नयन होते नम सदा समंदर है आँखें गिरे यहाँ बनकर शबनम पश्चिमी समीर बंद हुआ अब नष्ट हुआ उनका अहम भू से नभ छू उड़ान भर रख अपने हौसलों मे दम दुख उसे हो,जो कुछ खोता है आँसू पोछ दुख करो कम भूत…
