रख अपने हौसलों मे दम
मिले खुद के कर्म से गम
इसलिए नयन होते नम
सदा समंदर है आँखें
गिरे यहाँ बनकर शबनम
पश्चिमी समीर बंद हुआ
अब नष्ट हुआ उनका अहम
भू से नभ छू उड़ान भर
रख अपने हौसलों मे दम
दुख उसे हो,जो कुछ खोता है
आँसू पोछ दुख करो कम
भूत पर विश्वास मत कर
छोड़ दे यहाँ सारे वहम
फरिस्तो की कमी उनसा बन
संतो सा हो खुद सदा नरम
मनुज को जाति मे मत बाँटो
जगत मे मिलकर रहे हम
कुल का गौरव बन सदैव
खुद मिटा परिवार का तम
मानवता करें जा यहाँ
बढ़ाते जा मानव धरम
मजहब इक है मानवता
हम सब रहे सदा सम
– गौरव राठौर
जाँजगीर छ.ग.

