गुड टच-बैड टच, ‘ना बोलो, भागो और बताओ’ के नियमों से बच्चों को किया जागरूक

बीजापुर- महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल संरक्षण तंत्र और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत आश्रम स्कूलों एवं शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान बच्चों को गुड टच और बैड टच की पहचान, असुरक्षित स्थिति में ‘ना बोलना, भागना और बताना’ के नियम तथा पॉक्सो अधिनियम 2012 के प्रावधानों की सरल भाषा में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय आवापल्ली, कन्या आश्रम माटवाड़ा, आदिवासी विद्यालय नैमेड, प्राथमिक शाला एड्समेटा और प्राथमिक शाला कूड़ेर में बच्चों को बताया गया कि उनका शरीर उनका अपना है। यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से स्पर्श करता है, तो वे तुरंत मना करें और सुरक्षित स्थान की ओर जाएं।

बच्चों को असुरक्षित परिस्थितियों से बचने के बताए उपाय

जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को समझाया गया कि कोई भी व्यक्ति टॉफी, मोबाइल या पैसे का लालच देकर अकेले में बुलाए, तो उसके साथ नहीं जाना चाहिए। किसी भी प्रकार का डराने वाला ‘राज’ या ऐसी बात, जिससे बच्चा असहज महसूस करे, उसे अपने माता-पिता, शिक्षक, अधीक्षक या विश्वसनीय मित्र को जरूर बताना चाहिए।

बच्चों को यह भी जानकारी दी गई कि मुसीबत या असुरक्षित स्थिति में वे चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर कॉल कर सकते हैं। यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क है और बच्चों की सहायता के लिए उपलब्ध है। बालिकाओं को महिला हेल्पलाइन 181 के बारे में भी जानकारी दी गई।

चित्रों और खेल-खेल में समझाया गुड टच-बैड टच

अभियान के दौरान बच्चों को चित्रों, संवाद और खेल-खेल में गुड टच और बैड टच की पहचान समझाई गई। उन्हें बताया गया कि किसी भी गलत व्यवहार को छिपाना नहीं चाहिए, बल्कि तुरंत किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

इस अवसर पर आश्रम अधीक्षक, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है। ‘देखो, सुनो और बताओ’ के मंत्र के साथ प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन देना ही अभियान का मुख्य उद्देश्य है।