रबी में धान नहीं बोने वाले किसानों को प्रति एकड़ 20 हजार दिया जाएं।

किसान बइठका में किसानों ने भरी हुंकार ।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद – पिथौरा सांकरा क्षेत्र के किसानों का गौरिया में किसान बइठका का आयोजन किया गया। जिसमें जिला पंचायत सदस्य एवं किसान नेता जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर तथा भारतीय किसान यूनियन टिकैत के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही, पवन चन्द्राकर, प्रवीण चन्द्राकर एवं पंकज चन्द्राकर की विशेष उपस्थित एवं अजय साहू किसान गौरिया को अध्यक्षता में बैठक हुआ। बैठक में राज्य सरकार की कलेक्टरों के माध्यम से रबी फसल में धान बोने को लेकर गुमराह करने वाली आदेश के विरोध में खासी नाराजगी किसानों के बीच में बना हुआ है। खरीफविपणन वर्ष 2024.25 में समर्थन मूल्य में धान खरीदी पंद्रह दिन देरी के साथ 14 नवम्बर से शुरू हुई है। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य में 117 रुपये प्रति क्विटल की बढ़ोत्तरी को किसानों के देने भाजपा सरकार की नियत में खोट दिखाई दे रही है।

किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार की नीति और नियत किसान हितैशी दिखाई नहीं दे रही है। वर्ष 2024. 25 में समर्थन मूल्य में धान खरीदी 14 नवम्बर से शुरू हो गई है जो 31 जनवरी तक जारी रहेगी। लेकिन इस बीच 15 दिन देरी हुई है जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने में असुविधा होगी और दो व तीन टोकन में बेचने का दबाव भी रहेगा। इसलिए टोकन की संख्या और खरीदी की अवधि को बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य राज्य सरकार की 3100 रुपये और केन्द्र सरकार की बढ़ी हुई कीमत 117 रुपये जोड़कर 3217 रुपये प्रति क्विटल की दर से धान खरीदी और एकमुश्त भुगतान होगी यह भी सुनिश्चित करना चाहिए। पिछले सरकार की कैबिनेट में पारित राजीव गांधी किसान न्याय योजना की बकाया एक किस्त को किसानों को दिया जाना चाहिए। बैठक में सात सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया गया है जिसमें कहा है कि रबी फसल धान बोनी पर प्रतिबंध हटाया जाए, रबी फसल धान न बोने वाले किसानों को बीस हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दिया जाए। सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी लागू किया जाए। जोक नदी परियोजना चालू किया जाए, सिकासेर जलाशय से महासमुंद क्षेत्र में सिंचाई सुनिश्चित किया जाए। बैठक में सांकरा, बसना, पिथौरा, सरायपाली क्षेत्र से सुरेश रेवता कलेक्शन पटेल, नरोत्तम साहू, टिकेश्वर प्रधान, ब्रजेश, मोतीलाल भोई, मुरलीधर, मदन प्रधान, महेंद्र बांक, राजेश पटेल, परमजीत सिंह, हरिशंकर नायक, व मेघनाथ पटेल, सुमेन पटेल, प्रशांत प्रधान, उत्तर कुमार प्रधान, जगुनलाल कि नागेश, मिथलेश सहित गौरिया, सांकरा, खम्हारी, साजपाली, दुमरपाली, सहूदीपा, बामरादिह, लारिपुर, कोडाडिपा, बिछिया, बड़े लोरम, छतामोहा, बिजेपुर, बगारदारहा, नानकसागर, मतिदारहा, रिखादादार, लमकसा, जमहर, भगत देवरी सहित हजारों की संख्या में किसान एकजुट रहे।