नारी तुम शक्ति का हो दूजा नाम सहनशीलता हैं तुम्हारी बेमिसाल
विषय-नारी तुम शक्ति का दूजा नाम ——————————————– नारी तुम शक्ति का हो दूजा नाम सहनशीलता हैं तुम्हारी बेमिसाल तुम ही तो हो हौसलों की उड़ान कभी कम न होगी तेरी ये शान। दुष्टों के लिए तुम दहकती अंगार आँखों में भरती दर्द का ही सैलाब हर मुश्किल को करती हँसकर पार तुममें ही समाहित सकल…
