सतारा-महाराष्ट्र :- इस वक्त कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर फगरे. सर. के शुभ हस्ते प्रसिद्ध साहित्यिक और पत्रकार अमोल मांढरे. वाई इन का सत्कार समारंभ हुआ। इस वक्त अमोल मांढरे ने मातृभाषा मराठी का संवर्धन और अभिमान इस का महत्व विद्यार्थीयों के सामने रखा। और विद्यार्थी से अपील की है की, कॉलेज के बाद और उनके यशस्वी करिअर मे, दुनिया के किसी भी स्थान पर हो लेकिन अपनी मातृभाषा मराठी का आदर्श और पावित्र्य कायम रखे। महाराष्ट्र मे अनेक थोर महापुरुष और संतों की आदर्श पार्श्वभूमी है। उनके द्वारे बताये गये आदर्श ग्रंथ और साहित्य ये सब मराठी भाषा मे लिखित है। और उसको हजारो वर्ष की आदर्श परंपरा है। और इसकी यही ऊर्जा हम सब मराठी लोगो को अनेक मुसिबतो का सामना करने की ऊर्जा देती है। और इसके बाद मराठी विभाग के प्रमुख श्री कांबळे सर. ने साहित्यिक अमोल मांढरे जी का परिचय सभी विद्यार्थियों के सामने रखा। अमोल मांढरे इसी महाविद्यालय के माजी विद्यार्थी है। और वो प्रसिद्ध साहित्यिक और पत्रकार है। उन्होने इसी क्षेत्र मे अपनी मेहनत और उच्च विचारों से यशस्वी होकर अपने महाविद्यालय का नाम रोशन किया है। और सभी महाविद्यालय के छात्र और प्राध्यापक वर्ग को इसका अभिमान है। श्री अमोल मांढरे मराठी साहित्य ते के बाद हिंदी साहित्य क्षेत्र मे भी विशेष रूप से सक्रिय सहभागी है। महाराष्ट्र के बाहर राजस्थान,उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगड, कर्नाटक. मे हिंदी साहित्य क्षेत्र से जुडे हुए है। उनको अनेक राज्यस्तरीय साहित्य पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके है। और अनेक हिंदी राष्ट्रीय काव्यसंग्रह में व विशेष रूप से सहभागी है। उन्होने हमारे हम हिंदुस्तानी . अमेरिका के साप्ताहिक मे अनेक सामाजिक विशेष आलेख और कविता प्रकाशित की है और भविष्य मे भी अपनी पैर जमीन पर रख कर ही,समाज के साहित्य प्रेमी ,वरिष्ठो का आशीर्वाद और मित्रपरिवार के साथ आगे भी निपक्ष और निर्भीड रूप से साहित्य और पत्रकारीता क्षेत्र मे अपना कार्य जारी रखेंगे। यह आश्वासन उन्होने दिया। धन्यवाद. जय हिंद. जय भारत. लेखक. कविराज अमोल मांढरे. वाई, जिला सतारा. महाराष्ट्र।

