दैनिक अजय उजाला कार्यालय में रिपोर्टर सरोज कंसारी व पांडवानी गायिका पूनाबाई की भेंटवार्ता।

राजिम :- छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में बिखेर रहीं पांडवानी गायन की महक। सांस्कृतिक मंच पर छलक उठा दर्द। कहते हैं शिक्षा के बल पर ही हम देश दुनिया में उच्च पद पर प्रतिष्ठित हो सकते हैं। आज आधुनिकता के इस माहौल में बिना ज्ञान के जीवन अंधकार होता हैं। अशिक्षित व्यक्ति का कोई महत्व नहीं ऐसी सोंच को नकारते हुए छत्तीसगढ़ महतारी की गोद में एक छोटे से गांव में पली बढ़ी बेटी जों बिल्कुल भी नहीं पढ़ी हैं, अपनी हुनर और मेहनत के बल पर छत्तीसगढ़ के हर कोने मे अपनी पंडवानी गायिका के माध्यम से सफ़लता का डंका बजाने में आगे बढ़ रहीं हैं। राजिम माघी पुन्नी मेला के तृतीय दिवस पाण्डुका खट्टी अतरमरा से आई पूनाबाईं बंसोड़ सांस्कृतिक मंच क्रमांक दो से पंडवानी गायन की प्रस्तुति देकर राजिम की प्रसिद्ध अखबार दैनिक अजय उजाला और खबर गंगा संयुक्त अखबार कार्यालय में पत्रकार भेंटवार्ता के लिए पहुंची ।

जहां रिपोर्टर सरोज कंसारी से विशेष चर्चा के दौरान उन्होंने बताया विगत चालीस साल से पंडवानी गायन कर रहीं हैं। महज बारह साल की उम्र से इस विधा में हैं। अपना गुरु पिता रजऊ बंसोड को मानती हैं बचपन में पिता कथा सुनाते जिसे ध्यान से सुनती थी और रात्रि में सोते समय उसका चिंतन करतीं थी स्कूल गई नहीं पर कला किसी डिग्री की मोहताज नहीं सतत चिंतन मनन और प्रयास द्वारा हम अपनी मंजिल को प्राप्त कर सकते हैं मेरे आदर्श मेरे पति हैं जो हर कथा को विस्तार से बताते हैं दोनो बैठकर प्रतिदिन अभ्यास करते हैं आज जिस मुकाम मे हूं उसका पूरा श्रेय मेरे पति को हैं। कापालिक शैली में पंडवानी गायन करती हूं, मंच पर हनुमान भीमसेन भेंट वनपर्व प्रसंग की प्रस्तुति दी। जिसमें बताया गया की भीम को अपने बल का घमंड हो गया था जिसे तोडने के लिए हनुमान जी ने वृद्ध का रूप धारण किया और पांडव के वनगमन के मार्ग पर अपनी लंबी पूंछ फैलाकर बैठ गए जब सामने से पूंछ को हटाने भीम ने कहा तो हनुमान जी ने कहा आप ही हटा लीजिए।पर बलशाली भीम उसे हिला तक नहीं सकें और हार मान गए उनका घमंड चूर हो गया इसलिए कहते हैं किसी भी चीज़ का घमंड नहीं करना चाहिए।अभी तक बस्तर जगदलपुर सरगुजा के अलावा उड़ीसा और एम. पी. में प्रस्तुति दे चुकी हैं। शासन से यही अपेक्षा हैं की छत्तीसगढ़ के कलाकारों को हमेशा प्रोत्साहित करें और उन्हें शासकीय मंच प्रदान करें,जिससे उनकी प्रतिभा आगे बढ़ते रहें और पेंशन की सुविधा हर कलाकार को दे।विगत पंद्रह साल से इस मंच पर पंडवानी गायन कर रहीं हूं यहां आकर ख़ुद को धन्य महसूस करती हूं मेरी इच्छा हैं की जब भी मनुज तन मिले मै हर जनम में पंडवानी गायन करूं। आने वाली पीढी को भी यही संदेश देना चाहूंगी की वैसे तो हर विधा का महत्व हैं लेकिन पंडवानी को आज के बच्चों को सुनना और सीखना चाहिए, जिसमें ईश्वर की भक्ति के साथ ज्ञान का विकास होता हैं परिवारिक प्रेम-सौहाद्र संस्कार से जुड़ाव होता हैं धर्मशास्त्र हमें हमें सद्ज्ञान देते हैं बच्चे के हाथों में मोबाईल की जगह रामायण महाभारत गीता पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथ देना चहिए। लुप्त हो रहीं परंपरा को जीवित करना हम सभी का दायित्व हैं। भरथरी आल्हा नाचा पंथी और भी कई विधा हैं जिसे धूमिल होने से बचाना ही हमारा उद्देश्य हैं। आसपास गांव में जाकर प्रशिक्षण देती हूं कई शिष्य आज सीखकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। राजिम एक धर्म नगरी हैं जहां आध्यात्म की अविरल गंगा बह रही हैं। जीवन का अधिकांश समय गुजर गया पंडवानी करते पर आज पहली बार इस प्रकार साक्षात्कार देकर मै गदगद हो गई यह मेरे लिए यादगार पल रहेगा। सप्ताहिक खबर गंगा – दैनिक अजय उजाला के प्रधान संपादक, अजय कुमार देवांगन और उनकी टीम से सरोज कंसारी, सप्ताहिक खबर गंगा के स्थानीय संपादक सुश्री पिंकी साहू ने पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय सम्मान किया।