होगे नवा बिहान l 

                                        होगे नवा बिहान  कुकरा बासय छानही चघके, गरुआ मन जावत हें दईहान। चिरई मन रुख म गीत गावंय, संगवारी अब होगे नवा बिहान।। नांगर धरके किसान निकलय, खेत म सोनहा धान बोयें बर। पुछी डोलावय कमिहा…

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दांवा(आगी)ढिलागे—

दांवा(आगी)ढिलागे—– ——//—-//—–//——//—- देखव तो खेत खार म,फिर से दांवा ढिलागे | कतेक जीव जंतु ह, इंहा होरा कस भूंजागे|| पैरा के संगे संग म,हरियर रुख-राई ह जरगे| किसान के संगवारी,कतेक जीव जंतु ह मरगे|| चतुरा बन अपन हिस्सा के,सकेल डरेस दाना| फेर दूसर जीव जंतु ल,काबर करदेस बेगाना|| वाह रे इंसान तेहा,अतेक स्वार्थी कैसे हो…

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वही प्रेम

वही प्रेम जब अनुराग में भी बैराग आ जाए तब होता है विशुद्ध प्रेम वह प्रेम जो मीरा ने कृष्ण से किया वह प्रेम जिसमें पार्वती ने शिव को पाने शिव की ही आराधना की चौदह सहस्त्र वर्षों वह प्रेम जिसके विछोह में शिव ने तांडव किया वह प्रेम जिसकी आंच में मां शक्ति सती…

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झन काटो रुख ल

झन काटो रुख ल ——–//——-//—– झन काटो रुख ल,भोगे ल पड़ही न दुख ल| सब मनखे ल बतावव,रुख-राई के सुख ल|| मौहा ल काटबे त, पान-पतरी कहाँ ले पाबे| लइका बर,कमरछठ देवता ल,कइसे मनाबे|| दोना पतरी बिन पूजा के,कइसे पाबे सुख ल- पिकरी ल काटबे झन,तै छइंहा ल कहाँ पाबे| तिहि बता दे लक्ष्मीनारायण ल…

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//सुरता//

//सुरता// —————————————- घानी मुनी बोर दे पानी दमोर दे छत्तीसगढ़ म सांस्कृतिक मंच के जय घोष करइया ‘चंदैनी गोंदा’ के ए गीत ल तब आकाशवाणी आदि के माध्यम ले अबड़ सुनन. रविशंकर शुक्ला जी बरसा के माध्यम ले हमर देश म सुख अउ समृद्धि के कामना करत कहंय- घानी मुनी बोर दे पानी दमोर दे…

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🌳🌹वट सावित्री🌹🌳

🌳🌹वट सावित्री🌹🌳—————————————- आनंद उमंग भरे,अंग-अंग खिले-खिले , अमावस जेठ व्रत , *प्रेम से निभाइये*। महावर हिना रंग,नूपुर की छन-छन , कंगना श्रृंगार सोहे , *सिंदूर सजाइये* । कामना सौभाग्य सुख,अमर दांपत्य रूप , जटाधारी वृक्ष तले *भाँवर लगाइये ।* “सुषमा”सूरत सजे,मस्तक कुंकुम लगे , अखंड सुहाग पर्व , *पावन मनाइये*।। …..✍️सुषमा प्रेम पटेल 20230519 🌳🌹🌳🌹🌳🌹🌳🌹🌳

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वट-सावित्री-व्रत!

                  वट-सावित्री-व्रत! 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 अमावस्या ज्येष्ठ मास वट के समीप जा के, सूत साथ प्रदक्षिणा *करें अनुराग में!* अमृत समान जल देव वृक्ष सींचकर, दीप जला धूप रखें *कंडे वाली आग में!* बरगद समग्र सावित्री देवी रचे बसे, मूल ब्रह्मा मध्य हरि *शिव अग्रभाग में!* सुहागन नारी हस्त…

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थोरको संतोष नइ हे—-

कलजुग के दुख पीरा ह,हावय जी बड़भारी| चारों मुड़ा रोवत हावय,देखव सब नर नारी|| जेकर लइका नी हे,वोहा लइका बर रोवत हे| जेकर लइका हे,वोहा लइका के मारे रोवत हे|| बने हाँस के बतावत हे,भवानी ल त्रिपुरारी— जेकर कर धन नी हे,वोहा धन बर रोवत हे| जेकर धन हे,हाय रे!मोर धन कहि रोवत हे|| धन…

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बेंठ बिना,टंगीया के–

बेंठ बिना,टंगीया के– बिहनिया बेरा देखेंव त, रुख ह बने अड़े रिहिस| संझा के होवत ले कटाके, भुइंया म वो पडे़ रिहिस|| तोर हाल कइसे होगे जी, मेंहा पूछ परेंव रुख ल| बम फाड़के रोवत वोहा, बताइस अपन दुख ल|| वो बैरी लोहा के टंगीया ह, मोला धड़ा-धड़ काट दिस| फेर मोरे लकड़ी बेंठ बनके,…

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बेटा ल दुरियावव झन।

बेटा ल दुरियावव झन बेटी ल कतको पन्दौली दो, फेर बेटा ल दुरियावव झन| बेटा ल नालायक कहिके, गोबर कस लतियावव झन| ये सच हे बेटी ह ददा के, मान अऊ सम्मान होथे | फेर बेटा ह महतारी के, गरब अऊ गुमान होथे|| बेटी के आघु म बेटा के, स्वाभिमान ल चोट पहॅुचावव झन– बेटी…

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