होगे नवा बिहान l
होगे नवा बिहान कुकरा बासय छानही चघके, गरुआ मन जावत हें दईहान। चिरई मन रुख म गीत गावंय, संगवारी अब होगे नवा बिहान।। नांगर धरके किसान निकलय, खेत म सोनहा धान बोयें बर। पुछी डोलावय कमिहा…
होगे नवा बिहान कुकरा बासय छानही चघके, गरुआ मन जावत हें दईहान। चिरई मन रुख म गीत गावंय, संगवारी अब होगे नवा बिहान।। नांगर धरके किसान निकलय, खेत म सोनहा धान बोयें बर। पुछी डोलावय कमिहा…
दांवा(आगी)ढिलागे—– ——//—-//—–//——//—- देखव तो खेत खार म,फिर से दांवा ढिलागे | कतेक जीव जंतु ह, इंहा होरा कस भूंजागे|| पैरा के संगे संग म,हरियर रुख-राई ह जरगे| किसान के संगवारी,कतेक जीव जंतु ह मरगे|| चतुरा बन अपन हिस्सा के,सकेल डरेस दाना| फेर दूसर जीव जंतु ल,काबर करदेस बेगाना|| वाह रे इंसान तेहा,अतेक स्वार्थी कैसे हो…
झन काटो रुख ल ——–//——-//—– झन काटो रुख ल,भोगे ल पड़ही न दुख ल| सब मनखे ल बतावव,रुख-राई के सुख ल|| मौहा ल काटबे त, पान-पतरी कहाँ ले पाबे| लइका बर,कमरछठ देवता ल,कइसे मनाबे|| दोना पतरी बिन पूजा के,कइसे पाबे सुख ल- पिकरी ल काटबे झन,तै छइंहा ल कहाँ पाबे| तिहि बता दे लक्ष्मीनारायण ल…
🌳🌹वट सावित्री🌹🌳—————————————- आनंद उमंग भरे,अंग-अंग खिले-खिले , अमावस जेठ व्रत , *प्रेम से निभाइये*। महावर हिना रंग,नूपुर की छन-छन , कंगना श्रृंगार सोहे , *सिंदूर सजाइये* । कामना सौभाग्य सुख,अमर दांपत्य रूप , जटाधारी वृक्ष तले *भाँवर लगाइये ।* “सुषमा”सूरत सजे,मस्तक कुंकुम लगे , अखंड सुहाग पर्व , *पावन मनाइये*।। …..✍️सुषमा प्रेम पटेल 20230519 🌳🌹🌳🌹🌳🌹🌳🌹🌳
वट-सावित्री-व्रत! 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 अमावस्या ज्येष्ठ मास वट के समीप जा के, सूत साथ प्रदक्षिणा *करें अनुराग में!* अमृत समान जल देव वृक्ष सींचकर, दीप जला धूप रखें *कंडे वाली आग में!* बरगद समग्र सावित्री देवी रचे बसे, मूल ब्रह्मा मध्य हरि *शिव अग्रभाग में!* सुहागन नारी हस्त…
कलजुग के दुख पीरा ह,हावय जी बड़भारी| चारों मुड़ा रोवत हावय,देखव सब नर नारी|| जेकर लइका नी हे,वोहा लइका बर रोवत हे| जेकर लइका हे,वोहा लइका के मारे रोवत हे|| बने हाँस के बतावत हे,भवानी ल त्रिपुरारी— जेकर कर धन नी हे,वोहा धन बर रोवत हे| जेकर धन हे,हाय रे!मोर धन कहि रोवत हे|| धन…
बेंठ बिना,टंगीया के– बिहनिया बेरा देखेंव त, रुख ह बने अड़े रिहिस| संझा के होवत ले कटाके, भुइंया म वो पडे़ रिहिस|| तोर हाल कइसे होगे जी, मेंहा पूछ परेंव रुख ल| बम फाड़के रोवत वोहा, बताइस अपन दुख ल|| वो बैरी लोहा के टंगीया ह, मोला धड़ा-धड़ काट दिस| फेर मोरे लकड़ी बेंठ बनके,…
बेटा ल दुरियावव झन बेटी ल कतको पन्दौली दो, फेर बेटा ल दुरियावव झन| बेटा ल नालायक कहिके, गोबर कस लतियावव झन| ये सच हे बेटी ह ददा के, मान अऊ सम्मान होथे | फेर बेटा ह महतारी के, गरब अऊ गुमान होथे|| बेटी के आघु म बेटा के, स्वाभिमान ल चोट पहॅुचावव झन– बेटी…