वही प्रेम

वही प्रेम
जब अनुराग में भी बैराग आ जाए
तब होता है विशुद्ध प्रेम
वह प्रेम जो मीरा ने कृष्ण से किया
वह प्रेम जिसमें पार्वती ने शिव को पाने
शिव की ही आराधना की
चौदह सहस्त्र वर्षों
वह प्रेम जिसके विछोह में
शिव ने तांडव किया
वह प्रेम जिसकी आंच में
मां शक्ति सती हो गईं
वह प्रेम जिसकी धुनि में
राम ने सागर पर सेतु बांध दिया
वह प्रेम जिसके विश्वास में
तृण की तलवार से
सिया ने दशानन का दम्भ
तार-तार कर दिया
वह प्रेम जिसमें लखन की प्रतीक्षा में
उर्मिला एक पग में
चौदह वर्षों तक खड़ी रहीं
भरत की प्रतीक्षा में
मांडवी रानी होकर भी
साध्वी हो गईं
वह प्रेम जो मिलन विछोह से परे है
वह प्रेम जो वचन आशाओं से परे है
वह प्रेम जो मांगना नहीं
केवल देना जानता है
वह प्रेम जो उलाहना नहीं
स्वीकारना जानता है
वह प्रेम.. हां वही प्रेम
वह यदि है तो बस
वही सुखद है पर्याप्त है
शिव है व्याप्त है
वही प्रेम, हां वही प्रेम।।

© अन्नपूर्णा पवार आहुति
भाटापारा, छत्तीसगढ़।