पीकेईबी कोल ब्लॉक में हजारों पेड़ों की बलि।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद :- सरगुजा जिले के उदयपुर में संचालित पीकेईबी कोल ब्लॉक में हजारों पेड़ों की बलि । आदिवासी समाज के लिए जल, जंगल और जमीन बहुत मायने रखती है। आदिवासी जल, जंगल, जमीन के अधिकार के लिए लड रहे हैं। और आदिवासी मुख्यमंत्री तमाशबीन की तरह मुकदर्शक बनकर देख रहे हैं। विष्णुदेव साय पहले ऐसे आदिवासी मुख्यमंत्री हैं। जो स्वयं आदिवासी होकर आदिवासियों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई कर रही है। उपरोक्त बातें पूर्व संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने सरगुजा के उदयपुर इलाके के घाटवरी के पेंड्रामार में सैकड़ों हेक्टेयर में आच्छादित वनों के हजारों पेड़ों को काटे जाने के विरोध में कहीं‌। श्री चंद्राकर ने कहा कि आदिवासीयों के हित व उनके अधिकारों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस शासन काल में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उक्त क्षेत्र में जंगलों की कटाई तथा कोल उत्खनन पर रोक लगा दिया था। उन्होंने कहा था कि कोल उत्खनन के लिए हरे -भरे जंगलों की कटाई न्याय संगत नहीं है। कोल उत्पादन के लिए जो क्षेत्र तय किया गया, उसमें करीब 70 प्रतिशत इलाका तो फॉरेस्ट लैंड एरिया है। इसी क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की जा रही है, जो आदिवासियों के जीविकोपार्जन का मुख्य क्षेत्र है। श्री चंद्राकर ने आगे कहा कि प्रदेश में बड़े उघोगपतियों (भाजपा) की सरकार बनते ही यहां के जल, जंगल, जमीनो को भाजपा द्वारा अदानी, अंबानी जैसे उघोगपतियों के हवाले कर दिया गया है। कोल माइंस के लिए यहां जमीन अदानी को दी गई है। वही आदिवासियों के विरोध को दबाने रामलाल कारियाम साल्ही, जयनंदन सिंह पोर्तें सहित अनेक आदिवासियों को बेवजह गिरफ्तार कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। कार्य की गति देखीए पेड़ों को काटने पेट्रोल से बचाने वाली 500 से अधिक आरा मशीनों की मदद ली जा रही है। कोयला खदान के लिए 134. 760 हेक्टेयर जमीन से लाखों पेड़ों की कटाई की जा रही है।