
एक दिन के बात आय शहर के जुन्ना स्कूल म उहि स्कूल म पढ़ के निकले लइका मन के संगवारी मिलन समारोह होवत रिहिस हे,जेमा वो स्कूल के वो लइका मन ह आए रिहिस हे जेन मन ह इहि इस्कुल म पढ़ लिख के इंजीनियर,डॉक्टर, नेता, पुलिस, वकील अऊ न जाने का का नौकरी पा के सरकारी सेवा करत हावय,एकर छोड़ अऊ भी अंते अंते क्षेत्र म कारज करने वाला लइका मन आए रिहिस हे|माई पहुना ह पहुंचिस अऊ कार्यक्रम शुरू होईस|उन्हा पहुँचे पत्रकार मन ह एक-एक झन ल अपन-अपन जिनगी के अब तक के उपलब्धि ल का पुछिस,सब के सब अपन-अपन योग्यता के बढ़ा चढ़ाके बखान करे ल धर लिस,वकील कहीथे देश के पूरा कानून मोर मुट्ठी म हे,इंजीनियर ह कहीथे बड़े-बड़े पुल पुलिया कारखाना ल मेंहा बनाए हों,डॉक्टर ह कहीथे कि मरत मनखे के इलाज कर के,मैं वोला प्राण देथों,मैं धरती के भगवान हरंव,नेता कहीथे अरे देश म शासन करे के ताकत मोर हाथ म हावय,तुमन सब मोर मुट्ठी म हावव,ये किसिम ले जम्मो झन ह अपने अपन डिंगराही मारत राहे। देखते-देखत सभा म भारी हल्ला मचगे,कईसनों करके पत्रकार ह हल्ला गुल्ला कम करिस|
इहि बीच म पत्रकार के नजर ह एक झन सादा के धोती कुर्ता,अऊ आँखि म चस्मा पहिरे एक सियान के उपर पडिस जेकर उमर ह पैंसठ साल के आस पास रिहिस होहि, जेन ह ये जम्मो किस्सा ल चुप चाप देखत सुनत रहिस हे फेर चिट पोट नी करत रिहिस हे,पत्रकार ह वोकर तीर म जाके कहीथे,आप कोन हरो,अऊ तुंहर जीवन के हिसाब किताब का हे,अतका ल सुन के वो सियान कहीथे मोर जिनगी के कोई विशेष उपलब्धि नी हे जी, न तो मेन्हा कानून जानो,न तो कोई पुल पुलिया बनावंव, न तो राज पाठ करों,न काकरो इलाज करो, अइसन कोनो कारज नी करों, मोला तो संतोष इहि बात के हावय कि इंहा जुरियाय जम्मो लइका मन के जिनगी बनाने वाला, इंकर नसीब लिखने वाला सिरिफ में ह हरो, अऊ ये लइका मन ह मोर जिनगी के असल कमई हरे,मेंहा गुरुजी हरों साहब,,,,,,
रचनाकार :- श्रवण कुमार साहू, “प्रखर”
शिक्षक/साहित्यकार राजिम, गरियाबंद, (छ.ग.)
