वही शिक्षक कहलाता है—


शि- शिष्य को तराशता है,
जो अपने गहरे ज्ञान से|
शिष्टाचार सिखाता है,
कला और विज्ञान से||
जीवन के कंटक पथ पर,
जो चलना सिखाता है,
वही शिक्षक कहलाता है—

क्ष- क्षमता, ममता,दया, धर्म का,
भाव जीवन में जगाता है|
क्षमा,धैर्य और प्रेम की मूरत,
जो हम सबको बनाता है||
शस्त्र और शास्त्र की महत्ता,
जो हम सबको सिखाता है,
वही शिक्षक कहलाता है—

क–कलाकारी उनकी अद्भुत,
जो मिट्टी को मूरत बना दे|
और जादूगरी उनकी ऐसी,
जो शून्य को खूबसूरत बना दे||
रेत से घरौंदे बनाना,
जिनको हँसते हँसते आते आता है,
वही शिक्षक कहलाता है—

जो अपने सत्कर्मों से,
इस जग को राह दिखाता है|
है वही योगी इस जग में,
जो हर पल पूजा जाता है||
जो शिष्य को अमरत्व प्रदान करे,
वही शिक्षक कहलाता है—
रचनाकार- श्रवण कुमार साहू, “प्रखर”
सहायक शिक्षक शा.प्रा.शा.सुंदरकेरा
व्याख्याकार-तुलसी के राम मानस परिवार राजिम