
भोपाल-अवधेश पुरोहित
भोपाल :- 2003 में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के कठीन परिश्रम और प्रदेश भाजपा तत्कालीन नेताओं की कांग्रेस से नूरा कुस्ती के गठबधंन को नष्ट करने बाद मध्यप्रदेश की सत्ता पर भाजपा काबिल तो हुई लेकिन इसके बाद भाजपा नेताओं की रची गई साजिश के चलते उमा भारती को सत्ता से बेदखल कर मध्यप्रदेश की सत्ता पर काबिज शिवराज सिंह चौहान की पत्नी द्वारा अपना नाम छुपाकर डंपर खरीदी का खेल खेलकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सरकार की कार्यशैली का खुलासा प्रदेश की जनता और भाजपा के हाई कमान को संदेश दे दिया था? मगर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और उनकी पत्नी द्वारा डंपर कांड की घटना घटित कर दिए गए उस संदेश को ना तो प्रदेश की जनता समझ पाई और वह जो 1998 में इस मध्यप्रदेश के प्रभारी संगठन मंत्री के समय स्थानीय कुछ पत्रकारों के साथ बैठकर घंटों गपशप लगाकर प्रदेश के नेताओं की नज्ब टटोलने का काम करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उनके गुरु स्वर्गीय सुन्दरलाल पटवा का वह जुमला जो वह अक्सर कहां करते थे कि “ज्यौ की त्यौ रख दीनि चुर्रिया” की तर्ज पर उनके चेले को सत्ता पर काबिज करने के लिए स्वार्गिय पटवा जी समाचारपत्र में एक आलेख माध्यम से “मत चुके चौहान” का संदेश दिया था? उसे ना तो उस समय सत्ता पर काबिज उमा भारती समझ पाई और भाजपा के उमा सलाहकार पर संदेह को स्वार्गिय पटवा और शिवराज सिंह चौहान के समर्थक भाजपा नेताओं के समझने में देरी नहीं की? इसके बाद जो उमा को हटाने की मुहिम भाजपा के द्वारा चलाई तो दीनदयाल उपाध्याय परिसर से सीधे “राम रोटी यात्रा” निकलने के लिए मजबूर कर के दम ली? इसके साथ ही मध्यप्रदेश में शुरु हुई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समर्थकों द्वारा “छह पुडी-अचार और भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा दो सौ रुपए देकर भीड एकत्रित कर जुटाई गई भीड़ को दिखाकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सरकार की लोकप्रियता देखाने के दौर शुरुआत हुई? इस तरह से जुटाई गई भीड को देखकर 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब देश की सत्ता पर काबिज हुए तो उन्होने “ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा” का राग की शुरुआत की मगर वह भी मध्यप्रदेश में जिस तरह के शासन में “अंग्रेजी सरकार के समय आजादीके संघर्ष कर रह रहे नेता सुभाषचंद्र का चर्चित नारा तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” की तर्ज पर शिवराज सरकार का नारा” खाओ और खाने दो”तहत मध्यप्रदेश में चल रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चहते अधिकारियों ने जो सरकारी योजनाओं की फर्जी आंकड़ों की कागजों पर रंगोली सजा कर सरकारी खजाने को चूना लगाकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को खुश कर अपनी पीठ थपथपाने की शुरूआत की उसके चलते शिवराज सरकार में हुए ” निर्माण कार्यो के नाम पर भैरुबाबा” खडे करने का सिलसिला शुरू हुआ उसका ही परिणाम है कि आज मध्यप्रदेश कर्ज से डुब गया और शिवराज सरकार में “सबके सके साथ सबका विकास के नाम पर हुए निर्माण कार्य धर्म के नाम पर बने महाकाल लोक की एक भी बारिश नहीं झेल सके और ध्वस्त हो गए? शिवराज सरकार कार्य शैली निर्माण के नाम पर सरकारी खजाने को चूना का मुख्यमंत्री के चहते अधिकारी करते रहे वहीं एक सुनियोजित साजिश के तहत जनता और भाजपा हाईकमान ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी को अपनी सरकार की कार्यशैली की तरह ” छह पुडी-अचार और दो सौ रुपये देकर जुटाई भीड “की दम पर जैसा भाजपा नेता बताते हैं? प्रधानमंत्री मोदी को लोकप्रियता दिखाकर धमकाने का भी दौर खूब चलता रहा? लेकिन जैसे जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते जारहे हैं? वैसे वैसे शिवराज सरकार की फर्जी लोकप्रियता की कलाई सामने आती देख भाजपा के प्रधानमंत्री मोदी से लेकर हाई कमान तक चुनाव की कमान अपने हाथों लेकर मध्यप्रदेश के हवा हवाई नेताओं को “हाथी दांत ” जैसी स्थिति बनाने में लाने की रणनीति के तैयार की जा रही हैं?
