चंपकेश्वरनाथ महादेव में सवा लाख बिल्वपत्र अर्पित ।

नवापारा राजिम :- शहर से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पंचकोशी धाम चंपकेश्वर नाथ महादेव में अक्षय तृतीया के अवसर पर दूध, दही, जल से अभिषेक किया गया। 1008 दीप प्रज्वलित किया गया जिनके उजाले से पूरा मंदिर जगमगा उठा। सवा लाख बिल्वपत्र जैसे ही शिवलिंग पर चढ़ाया गया उसके बाद तो हर-हर महादेव के जयघोष होता रहा। विल्व पत्र चढ़ाने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़ा। एक तरफ भजन कीर्तन होते रहे दूसरी ओर महादेव के प्रति श्रद्धा, विश्वास के तार जुड़ते जा रहे थे। उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका है जब महादेव में सवा लाख बिल्वपत्र एक साथ समर्पित किया गया। बताना जरूरी है कि कमल क्षेत्र में पंचकोशी धाम है। प्रयाग नगरी राजिम के चारो दिशा में पांच स्वयंभू शिव पीठ मौजूद है जिनमें से उत्तर पूर्व में चंपारण स्थित चंपकेश्वरनाथ महादेव दूसरा पड़ाव है। इन 5 पीठों में पटेवा स्थित पटेश्वरनाथ महादेव, बम्हनी स्थित ब्रह्मकेश्वर नाथ महादेव, फिंगेश्वर स्थित फणीकेश्वरनाथ महादेव, कोपरा कर्पूरेश्वरनाथ महादेव प्रमुख है। यात्रा का समापन त्रिवेणी संगम स्थित पंचमुखी कुलेश्वर नाथ महादेव से होती है। बताया जाता है कि कमल की पांच पंखुडी पर 5 शिवलिंग, फूल के पराग पर कुलेश्वरनाथ महादेव तथा मूल में भगवान राजीवलोचन विराजमान है। अर्थात माना जाता है कि जिस तरह से काशी नगरी त्रिशूल की नोक विराजमान है उसी तरह से कमलपुष्प पर कमल क्षेत्र वर्तमान है। इस कमलक्षेत्र में हरि और हर के साक्षात् दर्शन होते हैं।

सामूहिक भोज में बंटे प्रसाद और भोजन

पश्चात सामूहिक भोज का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं को दाल चावल खीर पुरी का प्रसाद वितरण किया गया। यह भोजन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरुष एवं बच्चे उपस्थित होकर भोजन प्राप्त किया। भजन कीर्तन भी किया गया तथा धार्मिक भजनों पर भक्तजन झूमते रहे।

महादेव को बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय

आदिदेव महादेव को बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय है। इसे चढ़ाने से वह प्रसन्न होते हैं सामान्यतः तीन पत्ते वाली बिल्वपत्र महादेव में समर्पित किया जाता है। चंपकेश्वरनाथ महादेव में दूध, दही, शक्कर, सुगंधित तेल, शहद, बिल्वपत्र, कनेर, धतूरा इत्यादि चढ़ाकर पूजा अर्चना की। प्रत्येक दर्शनार्थी महादेव के अर्ध परिक्रमा करते रहे तथा अपने मनौती के शब्द नंदी के कानों में जरूर फुसफुसाया।