महाशिवरात्रि है, सूर्य और शनि दोनों कुम्भ राशि में हैं और चंद्रमा भी शनि की राशि मकर में है।

नवापारा राजिम :- आज यह ऐसा अद्भुत संयोग बना है कि इस महाशिवरात्रि की महिमा भी अनंत फलदायिनी हो गई है, यह कहना है नगर के ज्योतिष भूषण पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री का, उन्होंने कहा कि त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी ने इस महाशिवरात्रि को परम पुण्यदायक बना दिया है। रात्रि 8 बजकर 2 मिनट तक त्रयोदशी है और उसके बाद चतुर्दशी लग रही है, महाशिवरात्रि में शिवजी की पूजा विभिन्न विधियों से चारों प्रहर में की जाती है किंतु निषिठकाल की पूजा विशेष फलप्रदायिनी है जो आज रात्रि 11:52 से 12:42 तक है, शास्त्री ने कहा कि हमारा अंचल शैव परंपरा का उपासक रहा है, त्रेता युग में जगदम्बा जानकी के द्वारा प्रतिष्ठापित शिवलिंग महानदी के त्रिवेणी संगम में स्थापित है, कुलेश्वरनाथ के साथ पचकोशी धाम में शिवमंदिरो की अपनी पौराणिक महिमा है, काल सर्पदोष से पीड़ित, विवाह में विलम्ब और दाम्पत्य जीवन के क्लेश कलह के निदान के लिए, अकाल मृत्यु व मार्केश से मुक्ति दिलाने के लिए शिवजी का पूजन अपरिहार्य है, पौराणिक कथा है कि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की महाशिवरात्रि को शंकर भगवान शिवलिंग के रूप में इस मृत्युलोक में अवतरित हुए थे, यह शिवरात्रि शिव के शुभ विवाह की रात्रि भी कही गई है, आज नगर के श्री राम जानकी मंदिर से भोलेबाबा की भव्य बारात भी संध्या 6 बजे निकाली जायेगी, इसकी तैयारियों को लेकर बाबा के भक्तों का उत्साह ठाठे मार रहा है, पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि जब शिवलिंग प्रकट हुआ तो उसके ओर छोर की थाह ब्रह्माजी व विष्णु जी भी नही पा सकें तब उन दोनों ने ही इस शिवलिंग की प्रथम पूजा की थी, शिव पूजन में शिवलिंग पर चंदन, जल, दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, विल्वपत्र, धतूरा, भंग, भस्म, बेर फल अर्पित करने और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए, इससे जातक के समस्त कष्ट मिट जाते हैं यह शास्त्र सम्मत व अनुभूत सत्य है।