प्रशिक्षण कौशल से रोजगार की ओर बढ़े कांकेर के युवा, शिक्षक  सिद्धार्थ कुमार ने आवेदन पत्र दिया

कांकेर – जिले के सुदूरवर्ती एवं जनजातीय गांवों के युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक और सकारात्मक पहल सामने है। प्रथम हॉस्पिटैलिटी ट्रेनिंग सेंटर, कुरुद में कांकेर जिले के विभिन्न विकासखंडों के 12 युवा विभिन्न रोजगारमुखी ट्रेडों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इनमें हाउसकीपिंग, प्लंबिंग, परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे रीच का प्रशिक्षण शामिल है। नौकरी के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं ने आज के लिए आवेदन किया है। इस दौरान किशोरों ने अपने प्रशिक्षण एवं दोस्ती के संबंध में नामांकन की जानकारी दी। इनमें से 07 युवाओं का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और उन्हें हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।

रजिस्ट्रार  सोमनाथ कुमार ने युवाओं को उनके महोत्सव पत्र के साथ बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे ये युवा जिले के अन्य जिलों के युवाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत हैं। ट्रेनिंग पूर्ण करने के बाद भगवती नेताम, जयाबती मरकाम, संतोषी वट्टी, रंजला, राजेश्वरी नाग, कुलेश्वरी हेमंडी और उमा भारती नुरेटी का हॉस्पिटल सेक्टर में चयन हुआ है। इन सभी युवाओं को नौकरी पर लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। साथ ही उन्हें भोजन एवं आवास की सुविधा भी निःशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी। इन युवाओं का समूह गुजरात के छात्रावास अंकलेश्वर और सिलवासा के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के हॉस्टल में है। ये सभी युवा कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा, दुर्गूकोंदल, नरहरपुर एवं भानुप्रतापपुर विकासखंडों के विभिन्न जनजातीय एवं सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं में 7 युवतियां शामिल हैं, कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

सुदूरवर्ती पूर्व में आवासीय प्रभावितों के युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण की पाठशाला

इसी प्रकार का कौशल प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत करने की आम सहमति पर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने विशेष रूप से कोयलीबेड़ा, दुर्गूकोंदल, भानुप्रतापपुर, विकासखंड के दक्षिणी क्षेत्र के बच्चों और किशोरों को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए आदर्श तैयार करने को कहा। ये पूर्व में बौद्ध प्रभावित हैं और अब यहां विकास, शिक्षा एवं रोजगार क्षेत्र के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

कलेक्टर ने कहा कि इन सुदूरवर्ती क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं में प्रतिभा एवं क्षमता की कोई कमी नहीं है। उन्हें उनकी रुचि एवं क्षमता के संरचनात्मक मार्गदर्शन और गुणवत्ता पूर्ण प्रशिक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने प्रथम फाउंडेशन की स्थापना से ऐसे युवाओं को हाउसकीपिंग, प्लंबिंग, रिलायंस, वैज्ञानिक मनोविज्ञान सहित विभिन्न रोजगारोन्मुखी क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए व्यापक स्तर पर तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि पूर्व में बच्चों से प्रभावित सुदूरवर्ती इलाकों में शांति और विकास का माहौल बनने के साथ ही वहां के बच्चों और किशोरों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर सुनिश्चित करना जरूरी है। प्रशिक्षण कौशल के माध्यम से इन क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।