पोरा तिहार के रतिहा बेरा सुतत रहेवं।तभे काखरो सिसकई रोवई ल सुनके मोर नींद हर उछिन होगे।लाठी धर के बाहिर निकलेवं त देखेवं मोहाटी म एक ठिन भोकंडा गोल्लर माने नांदिया बइला ह बइठे सिसकत हे।ओला देख के पूछेवं-नांदिया बबा काबर रोवत हस। आज तो पोरा परब म तोर पूजा धजा करके लोगन बने खवाइन होहीं न।
तब ओहर बोहावत आंसू ल अपन जीभ म चांटत बोलिस- हव बाबू,हर बछर भादों महीना म अमावस के दिन पोरा परब मनावत नांदिया बइला ल पूजे जाथे। फेर आज बड़े फजर एक झिन परलोखिया हर मोला चार छे लउठी मारिस अउ गरम गरम पानी ल मोर ऊपर डार दीस।मोर चाम म फोरा परगे हे देख न।
अरे..रे..रे..रे कहत देखेवं त ओखर पीठ के चाम उकलगे रहिस। में हर झट ले भीतरी जाके मलहम लानेवं अउ ओखर घाव म लगावत कहेवं- बबा अपन जिनगी के काहिं कुछू किस्सा ल बता न।
*भोले के भरोसा के संगी नंदी*
मोर बात ल सुनके नांदिया बइला हर बताइस- बाबू,बेद पुरान म लिखाए हावय कि समुंदर ल मथे म निकले बीख ल भोलेनाथ हर पीयत रहीस तभे एक बूंद बीख भूइयां म गिरगे तेन ल हमरे पुरखा नंदिया बइला हर जगतहित बर चांट लेहे रहिस। तभे भोलेनाथ हर खुस होके अपन सवारी बना के नांदिया ल राख लीस। तब ले भोला के मन्दिर म बइठे के हक मिले हावय।भोले के भगत मन ह सिवालय म खुसरथें त पहिली पूजा नांदिया बइला के करथें।
अतका कहिके नांदिया बइला थोरिक मुचमुचावत बोलिस- हमर नाम ‘नंदी’ के अरथ होथे खुसी देवइया।हमन ल भोलानाथ के भरोसा के संगवारी, सिवालय के दुवारपाल तको कहे जाथे।ते पाए के सिवभगत मन ल भरोसा हे कि नांदिया बइला के कान म कहे बात ल नंदी हर भोलेनाथ ल बताथे।त भगत ल झटकुन फल मिलथे। मनखे के सुखी जिनगी के अधार नंदी हर होथे।
अतका सुनके में बोलेवं- सिरतोन ताए नंदी बबा, जम्मो जीव जन्तु के खाए बर,चाऊंर दार ल उपजाए खातिर खेत जोंते के बूता बइला बिना तो होबेच नी करत रहिस। तेन हिसाब म तो बइला मन हर सबके पालनहार हरव। नंदी बबा, आज के…….
*नांदिया बइला अउ सधारन बइला म फरक*
रूक रूक। थोरिक सांस ले बाबू कहत नंदी बबा हर मोला टोंक दीस।फेर बोलिस- बाबू, नांदिया बइला जेन ल तुमन ह गोल्लर कहिथो तेन ह नांगर अउ बइलागाड़ी म फांदे के काम नी आवय। थोरिक धियान लगाके सुन,गाय हर जब बछवा जनमथे त कतकोन भोलेभगत मन ह बछवा के कनिहा म गरम गरम तिरसूल के ठप्पा लगा के ओला गोबंस के बढ़ोतरी बर खुल्ला ढील देथें।उही बछवा हर बाढ़ के गोल्लर, सांड,नांदिया बइला कहाथे।
अउ ढोर डाक्टर मन ह बैग्यानिक तरीका ले जेन बछवा के बधियाकरन कर देथें तेन हर बाढ़ के खालिस बइला बन जाथे।उही बइला हर किसानी बूता माने नागर,गाड़ी,धौंरी कोपर म फांदे के काम आथे। फेर हां, पोरा तिहार के दिन नांदिया बइला अउ सधारण बइला माने दूनों के पूजा होथे।
*नंदी के पुरखा आय सिलाद रिसी*
अतका कहिके नांदिया बइला हर थोरिक रूकिस अउ पीठ ऊपर झूमे मांछी मन ल अपन पूंछी ले हकाले के पाछू फेर बताइस -सिलाद नाव के रिसी हर हमर पुरखा के जनक आए। ते पाय के हमन ल “सिलादपुत्र” कहे जाथे। एक अउ मजेदार बात बतावत हवं।एक घवं लंकापति रावन हर नांदिया बइला के चेहरा मोहरा ल देख के गजबे हंसी उड़ावत रहिस। तभे नंदी हर ओला सराप देहे रहिस कि तोर बिनास बेंदरा मन के हाथ ले हो ही।नंदी के सराप के सेथी दसमुड़िया रावन के बिनास हनुमान जी के बानर सेना संग मिलके राम जी हर करे रहीस।
अच्छा बात बताए जी। सही म हमला काखरो रंग- रूप के हंसी मजाक नी उडाना चाही।कहत में हरघर भीतरी ले लाने दू ठिन सोंहारी ल नांदिया बइला ल खवायवं। तब ओहर मोला मुड़ी डोलावत आसीस दीस। महूं बिदा ले लेहेवं।
*विजय मिश्रा ‘अमित’*
अग्रोहा कालोनी रायपुर (छग)मो9893123310
पोरा परब म नांदिया बइला के किस्सा-रावन के बिनास नांदिया बइला के सराप।
