सरग अऊ नरक…

——-///——- एक झन लइका कहीथे भैय्या, का सरग-नरक ह सच म होथे| तै वोकर भेद बता दे मोला जी, वोहा होथे त कइसन होथे|| मेंहा बात काहत हों सुन लो, लोग लइका अऊ सियनहा| सरग,नरक ह इंहीचे हावय, वोकर हावय ग चार चिन्हा|| जेकर तीर सुग्घर काया हे, धन,दौलत अऊ माया हे|| जे घर म…

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लू एक भीषण गर्मी….

आकाश से आग बरसा रहा है सूरज। गुस्सा शांत करो,सुन लो मेरी अरज।। झुलस रहे हैं निरीह सभी जीव-जंतु। राहगीर हुए मूर्छित,तड़प रहे आगन्तु।। तेजपुंज से पीघल रहा है हाड़-मांस। भूगर्भिक प्राणी की रुक रही है साँस।। सूख चुकी है नदी,चिलचिलाती धूप में। लू बन कर आया है काल के रूप में।। गर्म हवाएँ पी…

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उसनत बिरहा के आगी–

——///—–///—— जेठ आषाढ़ के गरमी जइसन, उसनत बिरहा के आगी रे| मन के कलपना कोन ल सुनावंव, कोन ह बनहि मोर रागी रे|| जेठ-आषाढ़ के महिना म, जइसन टोटा ह नंगत सुखाथे| तोर सुरता जब आथे बैरी, देख मोर अक्कल ह हजाथे|| जइसन कोनो घीव ल डारे, चूल्हा के धधकत आगी रे– जेठ के तपत…

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हाय रे बफ़े सिस्टम—

हाय रे बफ़े सिस्टम— ——-///—///—– कोन जनी,कोन ह,ये बफ़े सिस्टम ल बनाइस हे| भगवान जाने कोन,इंहा पहिली बार खाइस हे|| बफ़े म जाके खाना कोनों चुनौती से कम नइ हे| हमर अइसन मनखे बर,ये पनौती से कम नइ हे|| अइसने ये ठिन बफ़े के,सुनावत हों मेंहा कहानी| दु कौंरा भात बर मोला,सुरता आगे नाना नानी||…

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बरस रे बादर

बरस रे बादर आसाढ़ म अब करिया बादर ह छागे। संगवारी खेती-किसानी के दिन आगे।। मुड़ी उठाके घुरवा के खातू झांकत हे। बईलागाड़ी ह खलखला के हांसत हे।। टेटका के लाली देंह हा भूरवा होगे। मछरी, कोतरी मन नूनबोरवा होगे।। लेवा के मेचका जपत हे कंठी माला। मेकरा मन घलो बनाये लगिन जाला।। घांटी के…

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प्रकृति ह कामधेनु हरे—-

—–///—-///—///—- जब तक काटबे तै रुख ल, नंगत भोगे ल पड़हि दुख ल। आज तै जतके बोहाबे पानी, संकट म पड़हि जिनगानी|| डिस्पोजल के बढ़ाबे कचरा, वोतके बाढ़ही तोर लफड़ा|| जतेक निकलही,करखाना ले गैस, वोतके बाढ़ही खाँसी,दमा के केस|| तै जतके जलाबे पेट्रोल डीजल| तोर जिनगी होहि अकल-बकल|| आज जतके बिजली ल खपाबे| तैहा पाछु…

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ताज्जुब है यार—-

ताज्जुब है यार—- ✍✍✍✍✍✍✍✍ सरकारी कंस्ट्रकशन में,कोई भ्रष्ट्राचार नहीं| और दोस्तों के बीच,आज कोई गद्दार नहीं|| ताज्जुब है यार— आज रसोई के दाल में,जरा सा काला नहीं| बड़े अधिकारी,किसी मंत्री का साला नहीं|| ताज्जुब है यार— बहुमंजिला इमारत में,कहीं भी कोई ताला नहीं| करोड़ों का बजट है,लेकिन कोई घोटाला नहीं|| ताज्जुब है यार— डॉक्टर बिना…

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अब आशिक कहाँ डूबते हैं

अब आशिक कहाँ डूबते हैं अब आशिक कहाँ डूबते हैं प्यार में वो तो कहीं और तैर के पार हो जाते हैं। अब ज़ुल्फ़ों से कौन खेलता है मेरे दोस्त सब ही तो खोये रहते हैं अपने मोबाइल में अब हीर रान्झे जैसी मोहब्बत कौन करता है‌। सब टाईम ही तो पास करते हैं इश्क़…

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नशा

नशा किसी को शराब पीने का नशा है, दर्द और ‌गम को भुलाने के लिए। किसी को मांस खाने का नशा है, मूक जानवरों को मारने के लिए।। किसी को दौलत पाने का नशा है, व्यापार को अधिक बढ़ाने के लिए। किसी को भ्रष्टता करने का नशा है, गरीबों को बहुत सताने के लिए।। किसी…

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आडम्बर म —

आडम्बर म —- ——-///—–///—–///—- कतको मंदिर के दरशन कर ले, चाहे घुम ले तेहा चारों धाम| मुक्ति तोला मिले नहीं संगी, जब तक हिरदे म नइ हे राम|| कतको बेल पान,नरियर चढ़ा ले, तोला दरसन नइ देवे भगवान| घर के दाई-ददा ल छोड़ के, काबर खोजय पथरा म भगवान|| कतको भटक ले मथुरा काशी, चाहे…

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