अब आशिक कहाँ डूबते हैं

अब आशिक कहाँ डूबते हैं

अब आशिक कहाँ डूबते हैं प्यार में
वो तो कहीं और तैर के पार हो जाते हैं।

अब ज़ुल्फ़ों से कौन खेलता है मेरे दोस्त
सब ही तो खोये रहते हैं अपने मोबाइल में
अब हीर रान्झे जैसी मोहब्बत कौन करता है‌।

सब टाईम ही तो पास करते हैं इश्क़ के नाम पे
अब इन्तिज़ार कौन करता है प्यार में किसी का
ना मिले कोई तो दूसरा पहले ही वेटिंग में रहता है।

फुर्सत ही कहाँ है अहसासों की कदर करने की
तू नहीं तो वो या वो नहीं तो कोई और बस यही है।

सच कहूँ तो इश्क़ को इश्क़ अब समझता ही कौन है।

एक अनजान राही