मौसम में बदलाव के साथ खांसी-जुकाम हो सकता है। यह काफी आम समस्या है। लेकिन आम होने के बावजूद यह मरीज को काफी परेशान भी करती है। आमतौर पर खांसी-जुकाम 7-12 दिन में खुद ठीक हो जात है। लेकिन कई बार यह इससे ज्यादा दिन तक परेशान करता रहता है। दवाइयों के अलावा कुछ घरेलू उपाय भी हैं जो इस समस्या को ठीक करने में मदद कर सकते हैं। हैं। आइए जानते हैं कि खांसी-जुकाम की परेशानी को किन घरेलू उपायों से ठीक किया जा सकता है।
शहद और नींबू
खांसी के लिए ये एक अचूक नुस्खा है। गले की खराश को कम करने और खांसी को दूर करने के लिए एक गिलास गर्म पानी या हर्बल चाय में एक चम्मच शहद और ताजा निचोड़ा हुआ नींबू का रस मिलाएं। शहद के एंटीबैक्टीरियल गुण संक्रमण से भी बचाने में मदद करते हैं।
अदरक की चाय
अदरक में सूजन कम करने और माइक्रोब्स को खत्म करने वाले गुण होते हैं, जो सर्दी और खांसी में बहुत फायदेमंद होते हैं। अदरक की कुछ स्लाइस को गर्म पानी में कुछ मिनटों के लिए उबालकर अदरक की चाय बनाएं। इसमें स्वाद और असर बढ़ाने के लिए शहद और नींबू भी मिला सकते हैं। अदरक की चाय गले की सूजन को कम करती है और जकड़न को दूर करती है, जिससे सांस लेने में आसानी होती है।
हल्दी वाला दूध
हल्दी में करक्यूमिन होता है, जिसमें सूजन कम करने और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। गर्म दूध में हल्दी पाउडर मिलाकर पीने से खांसी कम होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। हल्दी वाला दूध खासकर सूखी खांसी में फायदेमंद होता है क्योंकि यह सूजन कम करके गले को आराम देता है।
भाप लेना
बंद नाक को खोलने और गले की जलन को कम करने के लिए भाप लेना एक कारगर उपाय है। एक बर्तन में पानी उबालें और सावधानी से उसके ऊपर झुकें, सिर को तौलिए से ढक लें ताकि भाप बाहर न निकले। कुछ मिनटों तक गहरी सांस लें ताकि भाप नाक और फेफड़ों तक पहुंचे। इसमें कुछ बूंदें नीलगिरी या पुदीने जैसा एसेंशियल ऑयल मिला सकते हैं, जिससे जकड़न कम करने में और मदद मिलेगी।
नमकीन पानी से गरारे करना
गले की खराश और खांसी के लिए नमकीन पानी से गरारे करना एक आसान और कारगर उपाय है। आधा चम्मच नमक को एक गिलास गर्म पानी में घोलें और 30 सेकेंड तक कुल्ला करें, फिर थूक दें। नमक के पानी से गरारे करने से सूजन कम होती है, बलगम पतला होता है और गले में मौजूद बैक्टीरिया खत्म होते हैं, जिससे खांसी और जलन से राहत मिलती है।
मुलेठी
मुलेठी या उससे बने मिठाई, जिसे ‘स्वीट वूड’ भी कहते हैं, खांसी के लिए एक असरदार आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। मुलेठी पाउडर गले में खराश, खांसी और गले में बहुत ज्यादा बलगम से निपटने में फायदेमंद है। मुलेठी में बलगम निकालने वाले गुण होते हैं। यह गले के अंदर बलगम को पतला और ढीला करता है। यह खांसी में राहत देता है और जमाव को कम करता है।
पिपली
जुकाम और खांसी से निपटने में पिपली एक असरदार जड़ी बूटी है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि यह आम जुकाम से जुड़े सिरदर्द और जमाव से राहत देती है। पिपली बलगम को ढीला करती है और इसे बाहर निकालने में मदद करती है, इस तरह रोगी आसानी से सांस ले पाता है। यह इसके बलगम निकालने वाले गुण की वजह से है।
सौंठ
सूखी अदरक जिसे सौंठ या सुक्कु या सूंठ भी कहते हैं, हर्बल कफ सिरप की ख़ास सामग्री में से एक है। सौंठ को जब शहद के साथ लिया जाता है, तो वह जुकाम और खांसी में आराम देने वाली दवाई की तरह काम करती है। सौंठ में कुछ अणु (मॉलिक्यूल) होते हैं जिनमें शोथरोधी (एंटी-इंफ्लेमेटरी) गुण होते हैं। इससे गले की खराश कम होती है।
दालचीनी
लकड़ी जैसे महकने वाले इस मसाले से स्वास्थ्य से जुड़े कई फ़ायदे होते हैं और उन फ़ायदों में से एक है जुकाम और खांसी से राहत। यह न सिर्फ आम जुकाम से राहत देती है, बल्कि गले में खराश के लिए भी बहुत अच्छी है। दालचीनी को प्रतिविषाणु (एंटीवायरन) गुण के लिए जाना जाता है। यह आम जुकाम करने वाले विषाणु (वायस्स) से लड़ने में मदद करता है।
गिलोय
गिलोय को हिंदी में अमृता या गुड्डुची के नाम से भी जानते हैं। इसमें दिल के आकार के पत्ते होते हैं जो पान के पत्तों की तरह लगते हैं। यह प्रदूषण, धुएं या पराग से हुई एलर्जी की वजह से होने वाले जुकाम और खांसी से निपटने में मदद करता है।
