तूंहर घर तेलई हमर घर बांसी नून कका बेलर में राम कथा के अंतिम दिन हुआ हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन कवि नूतन साहू के संचालन में हुई हास्य व्यंग्य की बरसात

तूंहर घर तेलई हमर घर बांसी नून कका

बेलर में राम कथा के अंतिम दिन हुआ हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन

कवि नूतन साहू के संचालन में हुई हास्य व्यंग्य की बरसात

राजिम 14 मार्च। बाजार चौक बेलर में श्रीराम यज्ञ समारोह के अंतिम दिन हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन संपन्न हुआ। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रोतागण काव्य रस का श्रवण पान कर भाव विभोर हो गए। कार्यक्रम का संचालन पैरोडी कवि नूतन साहू ने किया। हास्य कवि संतोष कुमार सोनकर मंडल चौबेबांधा ने हास्य चुटकुले देकर माहौल में रंग भर दिया। उन्होंने नारी शक्ति का गुणगान करते हुए छोटी बच्चियों को मां दुर्गा का रूप बताया और कहा कि- दो वर्ष की कन्या कुमारी, तीन त्रिमूर्ति रूपनीय है। चार वर्ष की कन्या कल्याणी, पांचवा माता रोहणी है। दुष्टों का संहार करती छठवां कालिका बन जाती, सातवां चंडिका आठवां मां शंभावी कहलाती। नव वर्ष की कन्या मां दुर्गा,दस सुभद्रा की अवतार है। ममता दुलार की प्रतिमूर्ति, करती हम सबकी बेड़ा पार है। इनके अलावा उन्होंने अनेक हास्य पंक्ति देकर हास्य रस की बरसात कर दे। पांडुका के गीतकार पुरुषोत्तम चक्रधारी ने छत्तीसगढ़ी में शानदार पंक्ति देकर लोगो का दिल जीत लिया। पंक्ति देखिए-तूहर घर तेलई हमर घर बांसी नून कका, फाटे करेजवा ला थोकिन तुन कका। राजिम के शायर जितेंद्र सुकुमार साहिर ने गजल की पंक्ति देकर माहौल में चार चांद लगा दी उनकी रचना देखिए-दर्द में बेहिसाब लिखता हूं, जिंदगी की किताब लिखता हूं। दर्द पढ़कर मेरे सब ने कहा, मैं ग़ज़ल लाजवाब लिखता हूं। उन्होंने कोरोना को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मौत तांडव मचा रही है अभी, सब की दहशत में जिंदगी है अभी। गांव कस्बे को छोड़िए साहब, पूरी दुनिया में खलबली है अभी। लोहरसी के गीतकार कमलेश कौशिक कठलहा ने देशभक्ति पर गीत देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया पेश है मुखड़ा-मिट्टी मेरे वतन की आबाद रहे तू, भूल जाऊं सारी दुनिया बस याद रहे तू। श्री कौशिक ने छत्तीसगढ़ी में गीत सुनाए-बाई के नखरा हजार कईसे करंव तोर ले प्यार हैं। इस मौके पर कवि देवेंद्र ध्रुव, जागेश्वर ने मंच संचालन किया तथा त्रोता गण ताली बजाकर कविता का लुत्फ लेते रहे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।