वन भूमि पर कथित अवैध खनन, बिना अनुमति एक साल से संचालित क्रेशर, मीडिया को कवरेज से रोकने पंहुचे सीआरपीएफ जवान
अवैध परिवहन कर रही वाहन को छोड़ने से बासागुड़ा TI की भूमिका पर भी उठे सवाल
ईश्वर सोनी सुकमा / बीजापुर
नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत पेंटाचिमली के तुमलपाड़ में बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की सड़क परियोजना की आड़ में वन भूमि से कथित रूप से बड़े पैमाने पर गौण खनिज के अवैध उत्खनन का मामला सामने आया है। आरोप है कि बिना वैधानिक अनुमति वन क्षेत्र से हजारों ट्रिप बोल्डर निकालकर सड़क निर्माण में उपयोग किया गया, जबकि इसी सामग्री को स्थानीय बाजारों और पड़ोसी राज्य तेलंगाना के भद्राचलम तथा चेरला तक भी बेचा जा रहा है.
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब बिना फिटपास गिट्टी परिवहन, एक वर्ष से बिना अनुमति संचालित क्रेशर, करोड़ों के संभावित राजस्व नुकसान, मीडिया कवरेज रोकने के आरोप तथा पुलिस और अन्य विभागों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
*वन भूमि में खनन का आरोप, हजारों ट्रिप बोल्डर निकाले जाने का दावा*
जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र जगरगुंडा के पूवर्ती-1 डीपीएफ कक्ष क्रमांक 475 की लगभग एक हेक्टेयर वन भूमि पर कथित रूप से गौण खनिज का उत्खनन किया गया। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि यहां से हजारों ट्रिप बोल्डर निकालकर BRO की सड़क परियोजना सहित अन्य स्थानों पर उपयोग किया गया। ग्रामीणों के अनुसार यह कार्य BRO परियोजना से जुड़े ठेकेदारों के माध्यम से कराया गया।
*BRO के नाम पर सिंडिकेट चलाने का आरोप*
सूत्रों का दावा है कि कुछ क्रेशर संचालकों ने कथित रूप से सिंडिकेट बनाकर BRO परियोजना का नाम इस्तेमाल किया। आरोप है कि BRO कार्य से संबंधित कागजात वाहनों पर चस्पा कर अवैध गिट्टी का परिवहन किया जाता था ताकि जांच के दौरान वाहन न रोके जाएं। स्थानीय स्तर के अलावा तेलंगाना के भद्राचलम और चेरला तक भी बड़ी मात्रा में गिट्टी सप्लाई किए जाने का दावा किया जा रहा है।
*बिना अनुमति एक साल से चल रहा क्रेशर? करोड़ों के राजस्व नुकसान का आरोप*
पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि संबंधित क्रेशर प्लांट कथित रूप से लगभग एक वर्ष से बिना वैधानिक अनुमति संचालित हो रहा है।
वर्तमान में सुकमा और बीजापुर दोनों जिलों का प्रभार संभाल रहे खनिज अधिकारी छबीलेश्वर मौर्य ने मीडिया से चर्चा में बताया कि सुकमा तथा बीजापुर जिले के तरेम स्थित क्रेशर प्लांट को अभी तक औपचारिक अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। उनके अनुसार उच्च अधिकारियों की मौखिक सहमति के आधार पर क्रेशर शुरू किया गया, जबकि नियमित अनुमति के लिए आवश्यक दस्तावेज अभी तक पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं हुए हैं।
यदि यह दावा सही है तो बड़ा सवाल यह उठता है कि बिना वैधानिक अनुमति एक वर्ष तक खनन और गिट्टी उत्पादन किस आधार पर चलता रहा?इस अवधि में सरकार को कितना राजस्व प्राप्त हुआ और कितना संभावित नुकसान हुआ, इसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
*अवैध क्रेशर में क्या है सीआरपीएफ की भूमिका ? आखिर क्यों मीडिया को कवरेज से रोकने पंहुचा सीआरपीएफ जवान*
मीडिया कर्मियों का आरोप है कि कवरेज के दौरान क्रेशर कंपनी से जुड़े कर्मीयो ने तत्काल सीआरपीएफ जवानों से संपर्क किया। इसके बाद पहुंचे जवानों ने फोटो और वीडियो बनाने से रोका तथा नक्सल क्षेत्र का हवाला देते हुए मीडिया कर्मियों को वहां से हटने के लिए कहा। मीडिया का आरोप है कि उन्हें कवरेज से रोकने और डराने का प्रयास किया गया।
*बिना फिटपास टिप्पर, बासागुड़ा TI की भूमिका पर सवाल*
मीडिया कर्मियों के अनुसार बिना फिटपास गिट्टी लेकर जा रहे एक टिप्पर को बासागुड़ा के पास रोककर खनिज विभाग को सूचना दी गई। आरोप है कि खनिज विभाग ने वाहन को जांच के लिए थाना भेजा, लेकिन खनिज विभाग की जांच पूरी होने से पहले ही वाहन छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद बासागुड़ा थाना प्रभारी (TI) की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
इसके बाद आवापल्ली बस स्टैंड के पास एक अन्य गिट्टी से भरे टिप्पर की सूचना उसूर एसडीएम को दी गई। मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने जांच कर कथित रूप से बिना फिटपास परिवहन पाए जाने पर कार्रवाई की। दोनों वाहनों पर BRO परियोजना से संबंधित कागजात लगे होने की बात भी सामने आई।
*कांग्रेस नेता हरीश कवासी ने भी लगाए गंभीर आरोप*
कांग्रेस जिला अध्यक्ष हरीश कवासी ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा से सड़क निर्माण और खनन के नाम पर सहमति लेने के दौरान ग्रामीणों से बोरिंग, खेत जुताई और अन्य विकास कार्य कराने का वादा किया गया था, लेकिन कोई भी वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
*अब उठ रहे हैं बड़े सवाल*
यदि क्रेशर को अनुमति नहीं मिली थी तो संचालन किसके आदेश पर हुआ?
क्या केवल मौखिक सहमति के आधार पर खनन कराया जा सकता है?
वन भूमि से निकाले गए खनिज का रिकॉर्ड कहां है?
सरकार को कितना राजस्व मिला और कितना संभावित नुकसान हुआ?
BRO के नाम पर कथित रूप से गिट्टी परिवहन करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?
मीडिया को कवरेज से रोकने सीआरपीएफ के इस्तेमाल क्यो ?
बासागुड़ा में पकड़े गए वाहन को जांच से पहले छोड़े जाने के आरोपों की सच्चाई क्या है?
क्या पूरे मामले की न्यायिक या उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी?
