शिव संयुजस्य गुरुपूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, साधना और सेवा का बना अनुपम संगम

कलश यात्रा, गुरु पूजन, पादुका पूजन, मंत्र दीक्षा, रक्तदान एवं भोग-भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता

राजिम – पूज्यपाद डॉ. आनंद मतावले गुरुजी, संचालक गुरुसत्ता आध्यात्मिक केंद्र एवं शांतिधाम साधक कल्याण वेलफेयर, तरीघाट (राजिम) के पावन सानिध्य में मुंगासेर (गाजर) में 28 एवं 29 जुलाई को आयोजित दो दिवसीय शिव संयुजस्य गुरुपूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति, साधना और सेवा के दिव्य वातावरण में गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ। महोत्सव में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ-साथ ओडिशा एवं महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में साधक-शिष्यों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर गुरुचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।महोत्सव के प्रथम दिवस का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा से हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार एवं मंगलध्वनि के बीच निकली कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात विधिवत गुरु पूजन एवं विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।द्वितीय दिवस पर गुरु पूजन, पादुका पूजन तथा पूज्यपाद डॉ. आनंद मतावले गुरुजी का प्रेरणादायी प्रवचन आयोजित हुआ। गुरुजी ने गुरु तत्व की महत्ता, महाविद्याओं के आध्यात्मिक रहस्य, प्राच्य साबर मंत्रों की साधना, वैदिक पूजन पद्धति, मंत्र दीक्षा एवं समस्या निवारण जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु का सानिध्य मनुष्य के जीवन को ज्ञान, संस्कार, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा प्रदान करता है।महोत्सव के दौरान अनेक साधक-शिष्यों ने गुरुजी से मंत्र दीक्षा ग्रहण कर नियमित साधना तथा मानव सेवा का संकल्प लिया। ध्यान, जप एवं आध्यात्मिक साधना के माध्यम से आत्मिक शांति, सकारात्मक जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक जागरण का संदेश भी दिया गया।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विशाल रक्तदान शिविर रहा, जिसमें साधक-शिष्यों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान कर मानव सेवा एवं जीवनदान के महायज्ञ में सहभागिता निभाई। रक्तदाताओं ने समाज को यह प्रेरणा दी कि रक्तदान सबसे बड़ा महादान है, जिससे अनेक जरूरतमंद लोगों का जीवन बचाया जा सकता है।

आयोजन समिति द्वारा सभी साधक-शिष्यों, श्रद्धालुओं एवं दूर-दराज से पधारे अतिथियों के लिए भव्य भोग-भंडारे (महाप्रसाद) की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर गुरु कृपा का लाभ प्राप्त किया। आयोजन के दौरान सेवा, समर्पण एवं अनुशासन की भावना प्रत्येक व्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।समापन अवसर पर पूज्यपाद डॉ. आनंद मतावले गुरुजी ने समस्त साधक-शिष्यों को सत्य, सेवा, साधना, संस्कार एवं मानव कल्याण के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहने का संदेश दिया। आयोजन समिति ने कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने वाले सभी साधक-शिष्यों, स्वयंसेवकों, रक्तदाताओं एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक एवं जनकल्याणकारी आयोजनों के माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार करने का संकल्प व्यक्त किया।