*शिक्षको में आक्रोश,कैबिनेट बिना परीक्षा के सीधे डिप्टी कलेक्टर नियुक्ति तो अनुकंपा के लिए मापदंड क्यो ?सभी को मिले अनुकंपा व शिक्षको को दे 50 लाख बीमा कवर: छ ग शिक्षक कांग्रेस ने की मांग*
रायपुर :छत्तीसगढ़ शिक्षक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अनिल शुक्ला, संभागीय अध्यक्ष पवन श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी नायक ,लालबहादुर साहू,जावेद खान, नरेंद्र कुमार साहू, ऋषि कुमार चंदेल,महासचिव संजय नैय्यर प्रदेश सचिव डॉ वेदलाल साहू, भागचंद चतुर्वेदी ने कहा कि राज्य शासन स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों की कोरोना ड्यटी तो लगा रही है परंतु उनकी सुरक्षा के प्रति गैर जिम्मेदार बनी हुई है।कोरोना ड्यूटी में लगे 100 से अधिक शिक्षकों की मृत्यु के बावजूद बीमा कवरेज व तृतीय श्रेणी में अनुकम्पा नियुक्ति का प्रावधान आज पर्यन्त नही किया गया है पूर्व पेंडिंग अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण व कोरोना काल समय मे मृत शिक्षको के परिवार के सदस्य को अनिवार्यतः नियम को शिथिल करते हुवे तृतीय श्रेणी व सहायक शिक्षक व सहायक शिक्षक प्रयोगशाला में नियुक्ति दी जावे उसके बाद निर्धारित प्रशिक्षण संबंधी शेष योग्यता पूरा करने के लिए 5 वर्ष का समय दे जब कैबिनेट निर्णय से मृत(शहीद) परिवार के मेंबर को बिना कंपीटीशन फाइड किये सीधे डिप्टी कलेक्टर नियुक्ति कर सकते है तो शिक्षको के लिए मापदंड तय कर सभी के लिए अनुकंपा नियुक्ति कार्य को रोकने का प्रयाश सही नही है शासन के इस गैर जिम्मेदाराना रवैये से आक्रोशित शिक्षकों ने शासन से मांग करते हुए कहा है कि उन्हें कोरोना वारियर्स का दर्जा दिया जाये उसके उपरांत ही उनकी कोरोना ड्यूटी लगाई जाए। शिक्षक हर परिस्थिति में अन्य विभाग के साथ कंधा से कंधा मिलाकर ड्यूटी करते आये हैं। वर्तमान में विभिन्न जोखिमपूर्ण ड्यूटी जैसे अस्पतालों में ड्यूटी, शमशान घाटों में ड्यूटी,वैक्सीनेशन सेंटरों में ड्यूटी, सेम्पल लेने में ड्यूटी, रेल्वे स्टेशनों व बस स्टैंडों में ड्यूटी,चेक पोस्टों में ड्यूटी, कांट्रेक्ट ट्रेसिंग में ड्यूटी, कोविड सेंटरों में ड्यूटी, कोरेंटाईन सेंटरों में ड्यूटी, टेस्टिंग में ड्यूटी आदि ड्यूटी पूरी ईमानदारी के साथ निभा रहे हैं। इसके बावजूद शासन ने शिक्षको को फ्रंटलाइन वर्कर्स नही माना है, जो कि बेहद खेदजनक है। जब भी शिक्षकों के हितों की बात होती है तो शासन, प्रशासन में बैठे जिम्मेदार लोग मुंह फेर लेते है फिर भी शिक्षक कभी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नही हटे वे निरन्तर शासन, प्रशासन के निर्देश का पालन कर ही रहे है।प्रदेश में कोरोना डयूटी से 100 से अधिक शिक्षको की मृत्यु हो गई पर उन्हें 50 लाख के बीमा कवर में नही लाया गया, अब तक कोरोना वारियर्स का दर्जा नही दिया गया है, इससे शिक्षको में भारी आक्रोश है। दिवंगत परिवार के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति के साथ साथ 50 लाख की बीमा कवर देने की मांग अभिषेक गोलछा, संतोष कुमार साहू, दशरथ वर्मा, मनोज मार्कण्डेय,अमित शर्मा,ओंकार शर्मा,कुंजल सिंह जगत, हरीश टांडे, गणेशु राम खूंटे, बलराम बंजारे ,लालजी सिन्हा, टीकू ध्रुव, सालिक राम साहू,हीरा सिंह यादव, भागीरथी साहू,वीणा ध्रुव,धनमत नेताम,आभा गंधर्व, सरिता गायकवाड आदि शिक्षकों ने की है। गरियाबंद जिला अध्यक्ष भागचंद चतुर्वेदी ने कहा कि यदि इस विषय पर सरकार गंभीरता पूर्वक विचार कर जल्द ही शिक्षकों के हित में निर्णय नही लेती है तो शिक्षकों को मजबूरन सभी कार्यो का बहिष्कार कर आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। जिस प्रकार चुनाव ड्यूटी के पहले शिक्षकों का बीमा करवाया जाता है ठीक वैसे ही कोरोना ड्यूटी के पहले समस्त शिक्षकों का बीमा करवाया जाए। यहाँ बताना लाजिमी होगा कि मध्यप्रदेश सरकार ने कोविड ड्यूटी में लगे विभिन्न कर्मचारियों को अलग अलग स्तर के अनुरूप बीमा की सुविधा प्रदान की है।अतः छ ग राज्य सरकार द्वारा पहले शिक्षकों के जान की समुचित सुरक्षा की व्यवस्था की जाए उसके उपरांत ही कोविड ड्यूटी लगाई जाए।
