समग्र बांस विकास सम्मेलन : बांस विशेषज्ञ ने बांस को पर्यावरण एवं उत्पाद के लिए उपयोगी बताया।

बांस की खेती को लेकर जिले में वैभवशाली योजना-कलेक्टर श्री मिश्रा।

धमतरी – एक दिव्य समग्र बांस विकास सम्मेलन का आयोजन आज स्थानीय मण्डल श्रवण अव्यवस्थितार्थ विद्यालय में किया गया। इस संग्रहालय के निर्माता  अविनाश मिश्रा ने कहा कि बांस एक ऐसा बहुउपयोगी प्राकृतिक संसाधन है, जो न केवल नया अवसर प्रदान करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि जिले के गंगरेल और तुम्बारा में बांस की खेती को लेकर विशेष कार्य योजना बनाई जा रही है। श्री मिश्रा ने यह भी बताया कि जिले की विशेष पिछौड़ी जनजाति बस्तियों में कमर परिवार द्वारा बांस से बनी सामग्रियां तैयार की जा रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से लाभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में बांस के विशेषज्ञ एवं रिटायर आई एफएस श्री ए.के. भट्टाचार्य बांस के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है, जिसका लाभ आप सभी उठाएंगे। कलेक्टर ने किसानों से अपील की है कि वे श्री भट्टाचार्य द्वारा नियुक्त किसानों से पूछताछ करें। इस अवसर पर डीएफओ श्री कृष्ण फ्लोराइड, कृषि एवं वन विभाग के अधिकारी, व्यापारी वर्ग एवं जिले भर से आये किसान बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।इस अवसर पर बांस विशेषज्ञ श्री भट्टाचार्य ने बांस की खेती, उसके प्रकार, प्रबंधन और विपणन के साथ-साथ बांस निर्माण के अवसरों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बांस, प्लास्टिक और स्टील सबसे अच्छे विकल्प हैं, और ये किसी भी रूप में उपयोगी नहीं हैं। उन्होंने किसानों को बताया कि बांस से न केवल पारंपरिक सामग्रियां, बल्कि आधुनिक घरेलू और सजावटी सामग्रियां जैसे फर्नीचर, लंगोट, पेन स्टैंड, कैनवास, सूपा, पोर्श, टूथब्रश, पानी की बोतलें, मशीनरी आदि भी बनाई जा सकती हैं, जिनकी बाजार में काफी मांग है।

श्री भट्ट ने अनाचार्य बांसा के प्रमुख फायदे

बांस विशेषज्ञ श्री भट्टाचार्य ने बांस के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बांस कई वर्षों तक एक बार आय का स्रोत साबित होता है। जबकि बांस पर्यावरण के लिए जादुई मिट्टी कटाव ज्वालामुखी है, कार्बन अवशोषण करता है और जल संरक्षण में सहायक होता है। रीटेल को उनके घर के पास ही आय के साधन उपलब्ध कराये जाते हैं। उन्होंने बताया कि बांस से तैयार नीबू की मांग देश-विदेश में प्रतिदिन आधी जा रही है। श्री भट्टाचार्य ने बेम्बू विलेज, आर्टिस्टिक कार्ड, बेम्बू एफ डिपो, किसान बेम्बू क्रेडिट कार्ड और क्रेटा-विक्रता मेटल्स का आयोजन करने की भी बात कही। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने बांस की खेती को लेकर अपना अनुभव साझा किया और प्रशासन से सहयोग की मांग भी रखी।