पढ़िए कवियत्री सरोज कंसारी की कविता, मन में नफरतों का सैलाब न भरिए…
“””””””””””””””””””‘”””””””” मन में नफरतों का सैलाब न भरिए प्यार की एहसासेे हर लम्हो में भरिए मजधारो में न उमंगों की कश्ती रखिए साहिल में ख्वाबों की बस्ती बना लीजिए। घुट- घुटकर गम के आँसू न पीजिए जिंदादिल हो हर दिल में राज कीजिए गुलाब सी अपनी शख्सियत भी रखिए काँटो की चुभन भ सहन कर…
