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मन में नफरतों का सैलाब न भरिए
प्यार की एहसासेे हर लम्हो में भरिए
मजधारो में न उमंगों की कश्ती रखिए
साहिल में ख्वाबों की बस्ती बना लीजिए।
घुट- घुटकर गम के आँसू न पीजिए
जिंदादिल हो हर दिल में राज कीजिए
गुलाब सी अपनी शख्सियत भी रखिए
काँटो की चुभन भ सहन कर लीजिए।।
मन में बेवजह की बातों को न रखिए
पवित्र भावों कोे अंतस में समेट लीजिए
सभी की नजरों में वजूद न सस्ती रखिए
औरो से जुदा मजबूत हस्ती भी रखिए।।
दिखावटी चकाचौंध में ही चूर न रहिए
सादगी का कभी श्रृंगार कर लीजिए
अंतर्द्वंद के जाल में ही न घुमड़ते रहिए
हर पल जिंदा अपनी मस्ती भी रखिए।।
हंसीन वादियों में भी अपनी नजर रखिए
इन नजारों में खुद को फ़ना कर दीजिए
दर्द को किसी की कभी भी न कुरेदिए
जख्मों पर मरहम किसी के लगा दीजिए।।
अनर्गल बातों की बंदिशे मन में न रखिए
सार्थक सोच के साथ स्वतंत्र ही रहिए
हरपल परेशानियों का रोना न रोते रहिए
हर जंग के लिए तैयार खुद को कीजिए।।
बेशक फर्ज ईमानदारी से अदा कीजिए
काम के बोझ तले हरदम दबे मत रहिए
एक समान नहीं रहती परिस्थिति कभी
परिवर्तन को भी स्वीकार कर लीजिए।।
अमानत हैं ये सांसे खुदा की याद रखिए
मिल-जुलकर सभी के साथ हरदम रहिए
दुश्मनी का भाव मन से अब तज दीजिए
दोस्ती हर हाल में जिंदगी से कर लीजिए ।।
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प्रेषक
कवयित्री
सरोज कंसारी
नवापारा राजिम
जिला-रायपुर (छ. ग.)
मंच को नमन
दिन-शुक्रवार
दिनांक- 22/01/21
आज की विधा-कविता
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विषय-साहिल

