प्रमोद दुबे
महासमुंद – आरटीआई कार्यकर्ता तथा पूर्व पार्षद पंकज साहू ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2003 से 2018 तक 15 वर्ष भाजपा सरकार रही और भ्रष्टाचार का कीर्तिमान स्थापित किया नतीजतन जनता ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया फिर पांच वर्ष कांग्रेस की सरकार को जनादेश प्राप्त हुआ और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सत्ता की कमान संभाली। इस सरकार में भी 14वें मंत्री भाजपा के ही कद्दावर विधायक-मंत्री रहे हैं जिन्हें सभी जानते हैं और पक्ष विपक्ष ने बखूबी हम साथ साथ हैं, की तर्ज पर जनधन को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक दल सांपनाथ तो दूसरा नागनाथ की मिशाल पेश किया है। 2023 के चुनाव में पूर्व विधायक डॉ विमल चोपड़ा ने भाजपा को विजयी बनाने के लिए घूम घूम कर प्रचार किया और सुशासन का दम्भ भरते रहे हैं। अब ऐसा क्या हुआ है कि तहसील के अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में जन समस्या व रिस्वतखोरी के विरुद्ध पूर्व विधायक को टेबल कुर्सी लगाकर सुनवाई करना पड़ रही है। स्पष्ठ है कि तहसील कार्यालय में जनता की समस्याओं का निराकरण नही होरहा है। फाइल, दस्तावेज गायब होने के साथ साथ रिस्वतखोरी चल रही है जिसे पूर्व विधायक (भाजपा) प्रमाणित करते हुए अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाकर शासन प्रशासन की पोल खोल रहे हैं। इस प्रकार सरकार की कथनी और करनी में कितना अंतर है उसकी पुष्टि भाजपा के पूर्व विधायक व कार्यकर्ता स्वयं ही कर रहे हैं जबकि जनता अपने को ठगा हुआ महसूस करने लगी है। क्षेत्र व प्रदेश में सिर्फ चेहरा ही बदला है, पर काम वही पुराना है रोज अखबारों में खनिज संपदा की लूट खसोट का समाचार प्रकाशित हो रहा है पर कार्यवाही शून्य है। खनिज संपदा की लूट का विधायक संरक्षण का कार्यक्रम 2013 से निरंतर जारी है जो यथावत है।
