राजिम :- चौबेबांधा में रविवार को लक्ष्मी पूजन के साथ गौरा गौरी की मूर्ति बनाने का क्रम शुरू हुआ और रात 12:00 बजे के बाद तैयार कर लिया गया। पश्चात घरों घर तेल मांगने की परंपरा का निर्वाहन किया गया। इधर कुंवारी बालिकाएं कलश सजा कर सीधे गौर चौंक में उपस्थित हुई। गौरा गौरी की जयकारा किया गया। पूजन अर्चना हुई तथा बारात निकाली गई। पूरे गांव का भ्रमण करते हुए पहट 4:00 बजे के करीब वापस गौर चौक में पहुंची। रास्ते भर सांकड़ लेते रहे। एक श्रद्धालु ने लगातार 10 मिनट तक अपने दोनों हाथ को पिटवाते रहे। इसके बाद गौरा गौरी के आसान पर जल रहे दीपक के तेल को अपने कलाई पर लगाया और वह शांत हो गया। 22 साल की इस युवक से पूछा गया कि तुम्हें दर्द हुआ कि नहीं। तब उन्होंने बताया कि दर्द तो हुआ लेकिन गौरी गौरा का नाम मन ही मन करता रहा। नतीजा दर्द में जो पीड़ा होनी चाहिए वह नहीं हुई और फिर तेल लगाते ही सब शांत हो गया। इसी तरह से अनेक उदाहरण देखने को मिला। वापस गौरा चौंक के पास पहुंचे और सात बार परिक्रमा किया गया। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह संस्कार को भली भांति संपन्न किया गया। सोमवार को भी सोमवती अमावस्या होने के कारण प्रतिमा का विसर्जन मंगलवार को दिया जाएगा। गणेश ध्रुव, ध्रुव राम, लालजी, सुखदेव ने बताया कि गांव में मुनादी करा दिया गया था जिसके कारण मंगलवार को सुबह विसर्जन शीतला तालाब में किया जाएगा। गणपत पटेल, वेदराम साहू, चम्मन साहू, हेमलाल साहू, रघुनंदन पटेल, परमेश्वर पटेल ने बताया कि गौरा गौरी की प्रतिमा बनाने के लिए तालाब किनारे की मिट्टी को पूजा अर्चना करके लाया गया और इस मिट्टी से ही प्रतिमा का निर्माण तत्काल किया गया। प्रतिमा को पूरे गांव का भ्रमण कराया गया। साकड़ के लिए मोवा बन को लाकर बरा गया। जिसे जिसे सांकड़ पीटने के लिए काम में लाया गया। छोटी बच्चियों से लेकर किशोर उम्र की बालिकाएं मिट्टी के कलश को शानदार सजाया गया था इसमें धान की बाली लगाकर आकर्षक लुक दिया गया था। नांदी में दीप प्रचलित किया गया जिनकी रोशनी से पूरा गांव जगमगा गांव उठा। पहली बार कलश अपने सिर पर रखने का सौभाग्य प्राप्त करने वाली बालिकाओं में गजब का उत्साह देखा गया। गूंजेश्वरी, वाणी, डिंपल इसी तरह से अंचल के सभी गांव में दीपावली त्यौहार की मौके पर गौरी गौरा का पूजा दर्शन किया गया बताया गया कि कुछ जगह सोमवार को ही विसर्जन कर दिया गया था लेकिन अधिकांश गांवों व शहर में मंगलवार को सुबह ही गौरी गौरा की प्रतिमा को सरोवर, नदी, तालाब में विसर्जित कर दिया जाएगा। मंगलवार को ही गौ माता को खिचड़ी खिलाया जाएगा तथा माखन ढ़ुलाने तथा गोवर्धन पूजा होगी। बुधवार को मातर एवं भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। ग्राम वासी अपने-अपने काम बात को बंद कर त्यौहार के रंग में रंग गए हैं छोटे बच्चे पटाखे फोड़ रहे हैं तो बड़े, बड़े पटाखे फोड़ रहे हैं। इस बार दीपावली का माहौल सबको उत्साह से भर दिया है।
