
बापू के जन्मदिन ल अहिंसा दिवस के रूप म मनाबो।रघुपति राघव राजा राम पतित पावन के गीत ल गाबो।।
स्वर्ग लोक ले उतर आइच, चमकत दिव्य एक आत्मा।
सफेद रंग के धोतिया पहिने, सत्य रूप दिखे विश्वात्मा।।
हाथ के लाठी ब्रह्मास्त्र तोर, चरखा तोर चक्र के समान।
शांति के दूत तोला कहिथें, भारत के विधाता, महान्।।
टैगोर ह महात्मा कहिस तोला, बोस कहिस तोला बापू।
भारत के तैंय राष्ट्रपिता हच, सत्य अउ अहिंसा के साधु।।
कानून के रखवाला बनके, जन अधिकार बर करे युद्ध।
किसान अउ श्रमिकों के, भूमिकर, भेदभाव के बिरुद्ध।।
माई लोगिन मन ल अधिकार अउ गरीबी ले मुक्ति देवाए।
आत्मनिर्भर, एकता अउ अपृश्यता के कार्यक्रम चलाए।।
स्वराज पाए के खातिर, किसिम-किसिम के करे उदिम।
अंग्रेज मन के नून कानून ल टोर के, छेड़े जबर मुहिम।।
साबरमती के संत कहाथच, जिनगी के आध्यात्मिक गुरु।
भारत ल आजादी देवाए, भारत छोड़व जंग करके शुरू।।
कवि- अशोक कुमार यादव मुंगेली, छत्तीसगढ़
जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय कवि संगम इकाई।
