
बालोद :- विवाह मंडप में दुल्हा के पिता त्रिलोकचंद ने आक्रोश में साफ-साफ कहा, “हमें तो पूरे रुपए चाहिए। हमने शादी में पांच लाख लेने के लिए तय किया था। परंतु तीन ही लाख दे रहे हैं गहने भी कम है।”
वधू के पिता नाथूराम ने कहा,” हम कुछ दिनों में और रुपए की व्यवस्था कर देंगे समधी जी। अभी शादी होने तो दीजिए। मेरी एवं मेरी बेटी की इज्जत का सवाल है। दूल्हा भीखम सातवां फेरे में रुक गया। रुपए और कीमती वस्तुओं की मांग कर दी। एक घंटा हो गया आगे बढ़ने का नाम ही नहीं लिया। “दुल्हन प्रतिज्ञा ने दूल्हा से कहा, “सातवां फेरे के लिए आगे बढ़ाना है अथवा जीवन भर यही खड़े रहना है। भीखम मौन रहा। फिर प्रतिज्ञा से रहा नहीं गया वे ओजस्वी स्वर से भरी सभा में प्रतिज्ञा की “मैं दहेज लेने वाले राक्षस के साथ विवाह नहीं करूंगी। भले ही कुंवारी रह जाऊंगी, मेरे मां-बाप कितनी मेहनत से रुपए कमाए हैं इतना ही नहीं औरों से कर्ज लेकर विवाह कर रहे हैं। मेरी वजह से और अपने मां-बाप को कर्ज से लादना नहीं चाहती।” लड़की के पिता नाथूराम ने कहा, “बेटी ठीक कह रही है। मैं सुरसा की तरह दहेज के लिए मुंह बाये भीखमांगे लोगों को अपनी बेटी नहीं दे सकता। ये लोग मेरी बेटी की कीमत क्या समझेंगे। मेरी बेटी को दासी समझ रखा है। वस्तु की तरह सौदा बाजी कर रहा है। ” प्रतिज्ञा भरी सभा में ऐलान करती हुई बोली, “इनमें से यदि कोई लड़का हो तो तैयार हो तैयार हो जाएं, चाहे गरीब लड़का क्यों ना हो। मैं उनके साथ शादी करने को तैयार हूं, पर इस अमीर भीखमंगे लड़के के साथ नहीं।”
प्रतिज्ञा की प्रतिज्ञा सुनकर सभा में प्रवीण को जोश आ गया, वह खड़ा हुआ और कहा, “यदि मेरे पिता एवं प्रतिज्ञा के पिता की आज्ञा हो तो प्रतिज्ञा के साथ शादी में करूंगा। क्योंकि दहेज के भिखारी को लात मारने वाली अदम्य साहसी लड़की से मैं बहुत प्रभावित हूं।” प्रवीण के पिता भी प्रतिज्ञा के साथ विवाह करने की राय दे दी। प्रतिज्ञा के पिता ने उन्हें समझाते हुए कहा, “बेटी। लड़का तो अत्यंत गरीब है। सड़क के किनारे लारी में चाय-नाश्ता बेचता है।” ” पिताजी। आप चिंता ना करें। हमारे देश के प्रधानमंत्री भी तो चाय बेचते थे। चाय बेचने वाला छोटा आदमी नहीं होता।” प्रतिज्ञा का विवाह चाय बेचने वाला के साथ हो गया। प्रतिज्ञा भी अपने पति के कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग की और चाय दुकान को बढ़ाते-बढ़ाते एक दिन होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल फाइव स्टार होटल की मालकिन बन गई।
कहानीकार दिनेंद्र दास
कबीर आश्रम करहीभदर
अध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद् तहसील इकाई बालोद, जिला- बालोद
(छत्तीसगढ़)
मो.856488 6665
