बिप्लब
पखांजूर :- आजकल ग्रामीण क्षेत्र में हुनरमंद व्यक्तियों की कमी नही हैं अपने अपने जुगाड़ से रोजी-रोटी कमाने के कई नाम परलकोट क्षेत्र से अब तक सामने आ चुके हैं अपने मछली पकड़ते हुए जाली,काटा,या अन्य तरीका देखे होंगे मगर इस बार पिव्ही 12 निवासी मानिक मल्लिक ने हेंड-मेकर जुगाड़ से छोटा इनवेटर बना डाला इस उपकरण के माध्यम से प्रतिदिन 10-15 किलो मछली बड़े-बड़े नदी-नालो से पकड़कर बाजारों में बेचते हैं।

मानिक की यह मछली पकड़ने की पद्यति से मछली जीवित रहता हैं मरता नही हैं कुछ समय के लिए वेहोस हो जाते हैं और बाजारों में जीवित मछली का भाव अधिक होने के कारण उन्हें अच्छा आमदनी भी मिलता हैं।मानिक ने प्रेस को बतलाया इसे बनाने में उन्हें अधिक पैसा बैटरी खरीदने में लगा बाकि भंगार कवाड की दुकान से जुगाड़ कर ली इस मशीन के पीछे उन्हें मात्र 2 हजार रुपया खर्चा करना पड़ा इस मशीन के सहायता से वे नदी में जाकर मछली पकड़ते हैं वही ग्रामीणों ने बतलाया मानिक का दिमाग बहुत अलग हैं हम मछली को जाली,काटा,या अन्य माध्यम से पकड़ते हैं मगर ऐ जो उपकरण बनाया हैं उससे मछली मरता नहीं हैं उन्हें झटका लगता हैं और कुछ समय के लिए वेहोश होकर पानी की सतह पे तैरने लगता हैं इससे मछली पकड़ना बहुत ही आसान हैं कम समय पे बहुत मात्र में मछली को पकड़ा जा सकता हैं।
इस उपकरण को बनाने में एक 12 वोल्ट की बैटरी,10,मीटर बिजली तार,एक आरी ब्लेड,एक 12 वोल्ट ट्रांसफार्मर, पुराना रिले,और भजिया तलने बाला झाझरी की सहायता से बनाया गया प्रतिदिन इस उपकरण को देखने के लिए उनके घरो पे भीड़ जमा रहता हैं चुकी परलकोट में बंग समुदाय के अधिक लोग रहते हैं जिनका प्रिय खाना मछली ही हैं।
