मित्र हो तो—


मित्र हो तो इत्र जैसा,
जो जीवन महकाय|
मित्र के सारे दुःख को,
अपने नाम कर जाय||

सखा जो सबसे खास हो,
एक दूजे के लिए आस हो|
रिश्ते नातों से भी बढ़कर,
सखा के ऊपर विश्वास हो||

एक दूजे के लिए मान हो,
मन में कटुता न गुमान हो|
आन ,बान और शान हो,
जीवन में एक मितान हो||

भले ही दोस्त एक हो,
लेकिन वो बन्दा नेक हो|
संकट में आपका साथ दे,
जिनका बुद्धि शुद्ध विवेक हो||

पवित्रता की बुनियाद पर खड़ा
रिश्ता बेंड नहीं हो सकता|
पीठ पीछे जो छुरा घोंपे,
वो सच्चा फ्रेंड नहीं हो सकता||
रचनाकार-:-
श्रवण कुमार साहू, “प्रखर”
शिक्षक/साहित्यकार, राजिम, गरियाबंद
(मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं)