बस्तर के इकलौते मंत्री कवासी लखमा और बीजापुर विधायक विक्रम मण्डावी से भी नाराजगी ,पिछले चुनाव के समय दोनों ने किए झूठे वादे इस बार सबक सिखाने को लेकर तैयार मूल आदिवासी बचाओ मंच के कार्यकर्ता।
गोरना धरने में पँहुचे भाजपा उपाध्यक्ष लवकुमार रायडू सहित भाजपा कार्यकर्ता , ग्रामीणों को दिया समर्थन और विधायक विक्रम को बताया आदिवासियों का सबसे बड़ा शोषक।
ईश्वर सोनी बीजापुर
बीजापुर:- जिले के गोरना में मूल आदिवासी बचाओ मंच के बैनर तले पिछले एक साल से आसपास के आदिवासी ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए है इस आंदोलन के एक साल पूर्ण होने को लेकर भारी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए जिसमे पुरूष – महिला – बुजुर्ग – बच्चे भी शामिल हुए और उनका सिर्फ एक मकसद था कि अपनी संस्कृति और जल- जंगल – जमीन को बचाये रखना और अपनी मांगों को लेकर गोरना में पिछले एक साल से अस्थायी झोपड़ी बनाकर परम्परागत सांस्कृतिक हथियार एंव वेशभूषा में डटे हुए है।

इनके आंदोलन में खाने पीने की व्यवस्था भी रखी गई है भीषण गर्मी को देखते हुए बीजापुर मुख्यालय से पानी टैंकर भी समय समय पर पँहुच रहा है ।
इन दिनों तेंदुपत्ता सहित इमली – महुआ – अमचूर का सीजन चल रहा है जिससे इन ग्रामीणों को कुछ आय हो जाती है लेकिन अपने आंदोलन को मजबूत करने ये काम भी छोड़ कर हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
आंदोलनरत ग्रामीणों का भुपेश सरकार से एक ही सवाल बस्तर 5वी अनुसूची क्षेत्र यंहा लोकसभा न विधानसभा सबसे बड़ी ग्राम सभा तो किसकी अनुमति से लग रहे सुरक्षाबलों के कैम्प निजी जमीनों पर।

गोरना में एक साल पूर्ण होने पर पहली बरसी में हजारों की संख्या में ग्रामीण जमा हुए और अपने संस्क्रति का परिचय देते हुए आदिवासी वेशभूषा में नृत्य करते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकार सहित मंत्री कवासी लखमा , विधायक विक्रम मण्डावी को जमकर कोसा इस दौरान ग्रामीणों ने मीडिया के माध्यम से सरकार से पूछा कि बस्तर 5 वी अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आता है यंहा लोकसभा और विधानसभा के अनुसार नही ग्राम सभा के अनुसार प्रस्ताव पारित होकर कार्य होते है फिर यंहा बिना ग्राम सभा अनुमति के निजी जमीनों में पुलिस कैम्प क्यो लगाए जा रहे है और चौड़ी सड़को का कार्य क्यो धड़ल्ले से जारी है , ग्रामीणों ने कहा कि सरकार का मकसद जबर्दस्ती केम्प ओर सड़क का जाल बिछा कर आदिवासियों के जंगल और जमीन पर कब्जा करना है।

इस तरह से हमारी संस्कृति को नुकसान पंहुचाया जा रहा है पुलिस कैम्प बनने के बाद उनकी स्वतंत्रता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी , पुलिस जबरन ग्रामीणों को मारपीट करने , फर्जी नक्सल मामले में जेल भेजने ,आदिवासी ग्रामीणों की पिटाई करने , फर्जी एनकाउंटर करने जैसी घटनाओं को अंजाम देगी और लगातर कर भी रही है उनका कहना है कि जब तक सरकार पेसा कानून और ग्राम सभा की अनुमति नहीं लेती तब तक उनके इलाके में सरकारी निर्माण कार्य का विरोध किया जाएगा। यदि सरकार को आदिवासियों का विकास करना है तो उनके अधिकारों की रक्षा करनी होगी। ना तो सरकार नियम कानून का पालन कर रही है और ना ही आदिवासियों को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने दे रही
भुपेश सरकार को ग्रामीणों का अल्टीमेटम ,मंत्री कवासी लखमा और विधायक विक्रम मण्डावी को भी चेताया ।
ग्रामीणों ने भुपेश सरकार को भी अल्टीमेटम दिया साथ ही मंत्री कवासी लखमा और बीजापुर विधायक विक्रम मण्डावी को भी चेताते हुए उन कहा कि यदि सरकार हमारे शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे आंदोलन को कुचलने का प्रयास करेगी तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यदि आदिवासियों पर अत्याचार बढ़ता है तो इसका खामियाजा कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार को भुगतना पड़ेगा साथ ही कवासी लखमा ओर विक्रम मण्डावी को भी भुगतना पड़ेगा।
ग्रामीणों का दावा 16 जगह चल रहे है आदिवासियों के आंदोलन।
आदिवासियों का दावा है कि बस्तर संभाग में कम से कम 16 जगहों पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी है। घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे हुए इलाके में हजारों आदिवासी ग्रामीण नारों के साथ-साथ गीत गाते हुए आन्दोलन स्थल में कई महीनों से डटे हुए है
