केदारनाथ सिंह के कविता शिल्प पर परिचर्चा l 

लखनऊ :- को मुख्यतः छन्द बद्ध कविता पर केंद्रित एक साहित्यिक बैठकी एवं सार्थक काव्य-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में तुलसीदास और कबीर के काव्य दर्शन पर गहन चर्चा हुई। चर्चा में बनारस से पधारे प्रख्यात आलोचक, चिंतक एवं विचारक डॉ इंदीवर पांडेय, ने और लखनऊ यूनिवर्सिटी के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफ योगेंद्र प्रताप सिंह जी ने अपने-अपने अमूल्य विचार रखे। वरिष्ठ साहित्यकार एवं ए डी जी पुलिस डॉ के सत्यनारायन जी ने स्मृतिशेष सुप्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार डॉ केदारनाथ सिंह, की कविता की गहनता से पड़ताल की। उन्होंने केदारनाथ सिंह पर की गई अपनी शोधपरक खोज पर रोचक चर्चा की। के नारायणन जी ने केदारनाथ सिंह के कविता-शिल्प के बारे में विस्तार से चर्चा की। तत्पश्चात पधारे गणमान्य कवियों ने अपनी -अपनी छान्दस रचनाओं का पाठ किया। वरिष्ठ नवगीतकार डॉ रविशंकर पांडेय जी ने अपना सुदृढ नवगीत पढ़ा। हास्य और व्यंग्य के दोहाकार डॉ दिनेश चंद्र अवस्थी ने अपने सघन और चुलबुले दोहे पढ़े।

कथाकार एवं नवगीतकार  शीला पांडे ने आमजन की संघर्षमय जिंदगी की व्यथा “नून, तेल लकड़ी की चिंता/ आधि-व्याधि / सिर पर फिरते हैं ” इन पंक्तियों में पढ़ी। कथाकार एवं कवि कुमार तरल , ‘नूतन कहानियाँ’ के संपादक डॉ सुरेन्द्र अग्निहोत्री, समीक्षक एवं कवियत्री डॉ रंजना गुप्ता, अवधी और हिंदी साहित्य में बराबर की दखल रखने वाली डॉ रश्मिशील शुक्ला और कवयित्री आर्यवर्ती सरोज तिवारी जी ने अपनी-अपनी मधुर छान्दस गीत पढ़े। साहित्यिक बैठकी, परिचर्चा और काव्य- संगोष्ठी का संयोजन एवं आयोजन ‘आकाशगंगा’ ट्रस्ट की तरफ से किया गया। सार्थक संगोष्ठी का समापन ट्रस्ट की अध्यक्ष शीला पांडे द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्पन्न हुआ।

तुलसीदास और कबीर का काव्य-दर्शन “

लखनऊ-को मुख्यतः छन्द बद्ध कविता पर केंद्रित एक सार्थक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में तुलसीदास और कबीर के काव्य दर्शन पर चर्चा हुई। चर्चा में बनारस से पधारे प्रख्यात आलोचक, चिंतक एवं विचारक डॉ इंदीवर पांडेय ने और लखनऊ यूनिवर्सिटी के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफ योगेंद्र प्रताप सिंह जी ने अपने-अपने गहन विचार रखे। वरिष्ठ साहित्यकार एवं ए डी जी पुलिस डॉ के सत्यनारायन जी ने स्मृतिशेष सुप्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार डॉ केदारनाथ सिंह जी की कविता की गहनता से पड़ताल की। उन्होंने केदारनाथ सिंह पर की गई अपनी शोधपरक खोज पर रोचक चर्चा की। के नारायणन ने केदारनाथ सिंह के कविता-शिल्प के बारे में विस्तार से चर्चा की। तत्पश्चात संगोष्ठी में पधारे गणमान्य कवियों ने अपनी -अपनी छान्दस रचनाओं का पाठ किया। वरिष्ठ नवगीतकार डॉ रविशंकर पांडेय ने अपना सुदृढ नवगीत पढ़ा। हास्य और व्यंग्य के दोहाकार डॉ दिनेश चंद्र अवस्थी जी ने अपने बेहद सघन और चुलबुले दोहे पढ़े । कथाकार एवं नवगीतकार  शीला पांडे ने आमजन की संघर्षमय जिंदगी की व्यथा “नून, तेल लकड़ी की चिंता/ आधि-व्याधि / सिर पर फिरते हैं ” इन पंक्तियों में पढ़ी। कथाकार एवं कवि कुमार तरल, नूतन कहानियाँ के संपादक डॉ सुरेन्द्र अग्निहोत्री, समीक्षक एवं कवियत्री डॉ रंजना गुप्त, अवधी और हिंदी साहित्य में बराबर की दखल रखने वाली डॉ रश्मिशील शुक्ला, कवयित्री आर्यवर्ती सरोज तिवारी ने अपनी-अपनी मधुर छान्दस गीत पढ़े। साहित्यिक बैठकी और संगोष्ठी का संयोजन एवं आयोजन ‘आकाशगंगा’ ट्रस्ट की तरफ से किया गया। सार्थक संगोष्ठी का समापन ट्रस्ट की अध्यक्ष शीला पांडे द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्पन्न हुआ।

“साहित्यिक बैठकी एवं काव्य-संगोष्ठी का आयोजन”

लखनऊ को मुख्यतः छन्द बद्ध कविता पर केंद्रित एक सार्थक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में तुलसीदास और कबीर के काव्य दर्शन पर चर्चा हुई। चर्चा में बनारस से पधारे प्रख्यात आलोचक, चिंतक एवं विचारक डॉ इंदीवर पांडेय ने और लखनऊ यूनिवर्सिटी के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफ योगेंद्र प्रताप सिंह जी ने अपने-अपने गहन विचार रखे। वरिष्ठ साहित्यकार एवं ए डी जी पुलिस डॉ के सत्यनारायन ने स्मृतिशेष सुप्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार डॉ केदारनाथ सिंह की कविता की गहनता से पड़ताल की। उन्होंने केदारनाथ सिंह पर की गई अपनी शोधपरक खोज पर रोचक चर्चा की। के नारायणन जी ने केदारनाथ सिंह के कविता-शिल्प के बारे में विस्तार से चर्चा की। तत्पश्चात संगोष्ठी में पधारे गणमान्य कवियों ने अपनी -अपनी छान्दस रचनाओं का पाठ किया। वरिष्ठ नवगीतकार डॉ रविशंकर पांडेय ने अपना सुदृढ नवगीत पढ़ा। हास्य और व्यंग्य के दोहाकार डॉ दिनेश चंद्र अवस्थी जी ने अपने बेहद सघन और चुलबुले दोहे पढ़े। कथाकार एवं नवगीतकार  शीला पांडे ने आमजन की संघर्षमय जिंदगी की व्यथा “नून, तेल लकड़ी की चिंता/ आधि-व्याधि / सिर पर फिरते हैं ” इन पंक्तियों में पढ़ी। कथाकार एवं कवि कुमार तरल जी , नूतन कहानियाँ के संपादक डॉ सुरेन्द्र अग्निहोत्री, समीक्षक एवं कवियत्री डॉ रंजना गुप्त, अवधी और हिंदी साहित्य में बराबर की दखल रखने वाली डॉ रश्मिशील शुक्ला, करुणा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था की संस्थापिका एवं अध्यक्ष, लेखिका और कवयित्री आर्यवर्ती सरोज तिवारी ने अपनी-अपनी मधुर छान्दस गीत पढ़े। साहित्यिक बैठकी और संगोष्ठी का संयोजन एवं आयोजन ‘आकाशगंगा’ ट्रस्ट की तरफ से किया गया। सार्थक संगोष्ठी का समापन ट्रस्ट की अध्यक्ष शीला पांडे द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्पन्न हुआ।