ईश्वर अनादि, अनंत है वह ना जन्म लेता है ना मरता है: संतोष सोनकर l 

राजिम :- छुईहा की मंडली प्रथम एवं द्वितीय, तृतीय परतेवा चतुर्थ सेम्हरतरा रहा। सेम्हराडीह रोहिना में ब्लॉक स्तरीय रामायण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। फिंगेश्वर ब्लॉक में 195 मानस मंडली में पंजीयन कराए थे जिनमें से 29 मंडलियों ने शानदार प्रस्तुति दी। जानकारी के मुताबिक प्रथम मारुती मानस मंडली छुईहा, द्वितीय स्वान्त: सुखाय मानस परिवार छुईहा, तृतीय जय राजीवलोचन मानस परिवार परतेवा तथा चतुर्थ परमेश्वर मानस मंडली सेम्हरतरा ने प्राप्त किया।

इस दौरान बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित होकर दो दिनों तक राम कथा का रसपान किया। प्रत्येक मानस मंडली का स्वागत सम्मान किया गया। सरपंच संघ के अध्यक्ष होमन साहू मौजूद रहकर ग्राम वासियों ने अच्छी व्यवस्था देने का भरपूर प्रयास किया। इस मौके पर टॉप टेन में जगह बनाने वाले श्रीराम दरबार मानस मंडली चौबेबांधा के व्याख्याकार संतोष कुमार सोनकर ने अरण्यकांड के प्रसंग पर सगुन एवं निर्गुण भक्ति धारा पर कथा सुनाते हुए कहा कि हिंदू ग्रंथों में ईश्वर के निर्गुण और सगुण दोनों रूप और उनके उपासकों के बारे में बताया गया है निर्गुण ब्रह्मा मानता है कि ईश्वर अनादि, अनंत है वह ना जन्म लेता है ना मरता है। सगुण भक्ति धारा का अर्थ आराध्य के रूप में गुण, आकार की कल्पना अपने भावानुरूप कर उसे अपने बीच व्याप्त देखना है। सगुन भक्ति में ब्रह्मा के अवतार रूप की प्रतिष्ठा है। उन्होंने आगे बताया कि रामचरित्र मानस शिष्टाचार सिखाने का कार्य करती है। रामचंद्र बचपन से ही माता-पिता का प्रणाम का यह बात सिद्ध कर दिया। धरती में मां बाप ही ईश्वर का रूप है इनकी सेवा ईश्वर की सेवा है। उन्होंने प्रत्येक घरों में रामायण पढ़ने की बात पर जोर देते हुए कहा कि कम से कम दो दोहा ही पढ़िए इससे घर परिवार में सुख शांति का आलम बना रहता है। जय मां दुर्गा मानस परिवार बासीन के व्याख्या कार शत्रुघ्न सिन्हा ने शबरी प्रसंग पर कहा कि सबरी धैर्य की प्रतिमूर्ति है। उन्होंने प्रभु राम के इंतजार में अपनी पूरी जीवन बीता दी। अंततः राम का दर्शन होते हैं

उनका जीवन सुधर गया। राम अपने भक्तों को कभी इंतजार नहीं कराते। क्योंकि सुख और दुख दोनों धूप और छांव है। कार्यक्रम का संचालन मुन्ना लाल देवदास एवं मोतीलाल साहू ने किया।