भाजपा के प्रति असंतोष पैदा करने में लगी हुई है आईएएस बाबुओं की फौज …?

अवधेश पुरोहित

भोपाल:- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यह अच्छी तरह से जानते हैं कि देश में यह आईएएस बाबबुओं की फौज कुछ भी करने में माहिर है, इन आईएएस अधिकारियों के बाबुओं की फौज मोदी के अनुसार फॢटलाइजर शक्कर का कारखाना भी चला लेते हैं, तो हवाई जहाज भी चला लेते हैं? कितने काम गिनाए जाएं जो यह आईएएस बाबूओं की फौज क्या कुछ नहीं कर सकती है? लेकिन आईएएस बाबुओं की फौज मध्यप्रदेश में जो कर रही है वह तो बड़ा अजब-गजब है, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के कार्यकाल में उनके चेहते आईएएस बाबुओं की फौज हर सरकारी योजनाओं की फर्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर मुख्यमंत्री को खुश कर सरकारी खजाने को चूना लगाने में लगे हुए हैं? यही वजह है कि आज प्रदेश इन आईएएस बाबुओं की बदौलत कर्जदार बना हुआ है, लेकिन इसके बाद भी जबकि मध्यप्रदेश सरकार को प्रतिदिन ५०० करोड़ रुपये का कर्ज प्रतिमाह लेना पड़ रहा है? लेकिन यह अधिकारी अपनी करगुजारी दिखाने में लगे हुए हैं? आज पीएम मोदी विंध्य और बुंदेलखंड की उन ५६ सीटों की नब्ज टटोलने के लिए विंध्य के रीवा में पधार रहे हैं? यही नहीं वह अपने इस कुछ घंटों के प्रवास के दौरान चार लाख ११ हजार हितग्राहियों को विजुअल के माध्यम से गृह प्रवेश कराएंगे, साथ ही मध्यप्रदेश की जनता जो इस प्रदेश में करोड़ों रुपये जल मिशन द्वारा खर्च किये जाने के बावजूद भी जल संकट से जूझ रही है? सत्ता पाने और जनता के असंतोष को कम करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उसी जल मिशन को ७.८५३ करोड़ लागत की पांच बड़ी समूह जल प्रदाय योजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे? हालांकि इससे पहले भी जल मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिये गये लेकिन इसके बावजूद भी भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार के द्वारा इलेक्ट्रानिक मीडिया पर प्रतिदिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा यह ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि प्रधानमंत्री की बहुआयामी योजना के अनुसार इस प्रदेश की हमारी बहनों को अब सर पर घड़ा रखकर जल लेने दूर नहीं जाना पड़ेगा। जल मिशन योजना के अंतर्गत उनके घरों में नल के माध्यम से जल मिलेगा? लेकिन इस ढिंढोरे के बाीर भी राज्य की स्थिति यह है कि चाहे वह बुंदेलखंड और विंध्य की ५६ सीटें हों या आदिवासी बाहुल्य जिले झाबुआ, अलीराजपुर, मंडला, अनूपपुर, सिंगरौली सहित प्रदेश का शायद ही ऐसा कोई जिला हो इन आईएएस बाबुओं के फर्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर नल-जल योजना से अपनी फौज द्वारा घरों में नल लगवा दिय गए। लेकिन इसके बाद भी प्रदेश की जनता को जल संकट से मुक्ति नहीं मिल पा रही है यह स्थिति उस जल मिशन की है जिसके द्वारा अभी तक करोड़ों रुपये खर्च कर दिये गये और पीएम मोदी उसी जल मिशन की पांच समूह योजनाओं के लिये सात करोड़ ८५३ रुपये जारी इन आईएएस बाबुओं के द्वारा रंगोली सजाकर सरकारी खजाने को फिर चूना लगाने के लिये कर रहे हैं यह स्थिति अकेले जल मिशन की नहीं है प्रधानमंत्री जी? इन आईएएस बाबुओं की फौज के कारनामे प्रदेश की अनेक योजनाओं को सफल बनाने में लगे हुए हैं, चाहे वह नहर योजना की हो जिस रीवा जिले में प्रधानमंत्री आज प्रवास कर रहे हैं उसी रीवा जिले में सरकार द्वारा चलाई गई नहर योजना फेल हो गई उससे परेशान किसानों ने अपने स्वयं के द्वारा मेहनत करके अपने खेतों में पानी पहुंचाने के लिये नहर योजना अपने खुद के श्रम से प्रारंभ की है? यही स्थिति लोक निर्माण विभाग की भी है विभाग के प्रमुख सचिव जो आईएएस बाबु विराजमान हैं उनकी बदलौत लोक निर्माण विभाग में सभी कुओं में भंाग घुले होने की स्थिति नजर आती है? लोक निर्माण विभाग के अधिकांश अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए हैं और जब विभाग का मुखिया ही सरकार को चूना लगाने के उद्देश्य से अपने बेटे को कार्य दिलवाकर गुणवत्ताविहीन कार्य कराने में लगे हुए हैं तो बाकी विभाग की क्या स्थिति होगी? जिसे इस प्रदेश की जनता के समक्ष ढिंढोरा पीटने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यह कहते नहीं थकते कि अब प्रदेश में भ्रष्टाचारियों के लिये मध्यप्रदेश में कोई जगह नहीं है वह मध्यप्रदेश छोड़ दें? लेकिन जब उनके ही स्वयं के मुख्यमंत्री निवास पर इसी लोक निर्माण विभाग के एक अपनी कार्यशैली में माहिर अधिकारी को छोटी सी एनेक्सी बनाने के लिए छह करोड़ का बजट मुख्यमंत्री के समक्ष पेश किया था तो वह भी उस बजट की राशि देखकर अचंभित हो गए थे, लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों को चेतावनी देने वाले मुख्यमंत्री आम नागरिक की तरह अपनी कारगुजारी में माहिर अधिकारी को छोडऩे के लिये क्यों मजबूर हो गये थे? यह सवाल लोक निर्माण विभाग के ईमानदार अधिकारी और आम जनता में चटकारे लेकर चर्चाओं में हैं? जब मुख्यमंत्री ने स्वयं छोटे से काम की छह करोड़ का इस्टीमेट देखा था तो उन्हें यह समझ में आ गया होगा कि प्रदेश में लोक निर्माण विभाग में वर्षों से यह गोरखधंधा चरम पर है, जिसके चलते सरकारी विभाग के बड़े-बड़े इस्टीमेट बनाकर चूना लगाने का काम ततो चलता ही है? तो वहीं ऐसी गुणवत्ताविहीन पुल-पुलियों का निर्माण भी कराया जाता है जो एक ही बारिश में बह जाते हैं? जब मुख्यमंत्री जैसे अपनी कार्यशैली में माहिर अधिकारी की कारगुजारी पर चुप्पी साध लेते हैं, इसी का नतीजा है कि जब कोई पत्रकार इन भ्रष्ट अधिकारियों की कारगुजारी को लेकर लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज करवाता है तो उस पर अपने भ्रष्टाचार का पर्दा डालने के लिये जातिसूचक मामला दर्ज कराकर उसे परेशान किया जाता है? लेकिन मुख्यमंत्री ऐसी भ्रष्टाचार की कार्यशैली में माहिर अधिकारी को यों ही छोड़ देते हैं? तो फिर काहे को अपने श्रीमुख से यह ढिंढोरा पीटते हैं कि भ्रष्ट अधिकारियों के लिये मप्र में कोई जगह नहीं है वह मप्र छोड़ दें? मुख्यमंत्री की इसी कार्यशैली का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में पीएम मोदी के यह आईएएस बाबू विभागों के प्रमुख होकर फर्जी आंकड़ों कीभाजपा के प्रति असंतोष पैदा करने में लगी हुई है? मध्यप्रदेश के आईएएस बाबुओं की फौज …?