किरंदुल /रणवीर सिंह चौहान
पहले भी इस सड़क पर कंपनी के हाइवा से हो चुकी है आदिवासी की मौत।
कंपनी के लाल जहर से गिर सकता है बस्तर में शिक्षा का ग्राफ।
किरंदुल :- आर्सेलर मित्तल कम्पनी के कार्यप्रणाली को समय समय पर शासन प्रशासन को ख़बरों के माध्यम से अवगत कराते आ रहे है आखिर इस बात का अंजाम शिक्षकों को भुगतना पड़ा । कुछ शिक्षक उस पूल से नीचे गिर पड़े। जसमे की एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
दंतेवाड़ा जिले के सुदूर अंचल बैलाडीला में स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मितल निप्पन स्टील इंडिया लिमिटेड अपने पूर्व नाम एस्सार स्टील की स्थापना के समय से ही विवादों में रहते हुए अखबारों की सुर्खियों में बने रहती है ।विदित है कि बस्तर के लाल गलियारों में विकास वैसे भी देरी से पहुँचता है।

जहाँ एक तरफ जिला प्रशासन आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत भारत देश के भविष्यो नन्हे मुन्ने बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगाने के लिए कृतसंकल्प होते हुए निरंतर बस्तर में शिक्षा के विकास के लिए कई योजनाओं को अमलीजामा पहनाने की कोशिश में लगे रहते हुए कई प्रतिशत सफलता की सीढ़ी भी चढ़ रहा है । परंतु आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र चोलनार पालनार, किरंदुल बस्ती की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां करती नजर आ रही है ।

आर्सेलर मित्तल की कंपनी के लोह अपशिस्ट को भारी भारी वाहनों के माध्यम से कंपनी से लेकर कई अन्यंत्र स्थानों तक परिवहन किया जा रहा है । इस ही कड़ी में कई वर्षो से कंपनी की बड़ी बड़ी ट्रकों के वजन को झेल रही किरंदुल के गाँधीनगर से किरंदुल बस्ती की ओर जाने वाली सड़क पर मुख्य पुलिया है । शनिवार को इस पुलिया को पार करते हुए किरंदुल बस्ती ,चोलनार ग्राम एवं पालनार ग्राम के आसपास स्थित विद्यालय में अपनी सेवाएं देने वाले कई शिक्षक कंपनी के परिवहन कार्यों में लगी भारीभरकम वाहनों एवं पुलिया पर गिरे कंपनी के गीले अपशिस्ट प्रदार्थो के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गए ।

जिसके बाद सभी शिक्षकगणों ने सड़क पर उतरकर कंपनी की भारीभरकम वाहनों को रोककर चक्काजाम कर दिया ।उल्लेखनीय है कि किरंदुल से लेकर पालनार तक सड़क किनारे करीबन 18 स्कूल है जिस कारण कई स्कूली बच्चों को सड़क किनारे चलते हुए या सड़क पार कर विद्यालय जाना होता है । सड़क पर सरपट दौड़ रही वाहनों से उड़ती लाल धूल के गुब्बारों से बच्चों की सफेद ड्रेस स्कूल पहुँचते तक शुर्ख लाल रंग में तब्दील हो चुकी होती है ।

कंपनी की एवं कंपनी के कार्यों में संलिप्त ठेकेदारों की दबंगाई के कारण जनप्रतिनिधि भी सहम जाते है । दबंग ठेकेदारों के दंबगाई के चलते वहा के लोग भी डरे सहमे रहते है आखिर अब किस्से करेंगे ग्रामीण अपना फ़रियाद। अब यहाँ के आदिवासी व आम जनता के जागने का वक़्त है नहीं तो ऐसी दुर्घटना हमेशा जन्म लेती रहेंगी ।
