
भूपेंद्र लहरे
सक्ती :- महिलाओं के प्रति मन में विशेष आदर व सम्मान का भाव विकसित कर उनके साथ संविधान सम्मत व्यवहार पुरूष प्रधान समाज को करने की जरूरत है। महिला शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्र माता सावित्रीबाई फुले तथा फातिमा शेख द्वारा जलाई शिक्षा की अलख से फैली ज्ञान की रौशनी का ही परिणाम है कि हम आज की महिलाएं सम्मान की जिंदगी गुजर बसर कर पा रहे हैं। बाबा साहब डा अंबेडकर जी के द्वारा महिला उत्थान के क्षेत्र में किए अविस्मरणीय कार्यों से हम महिलाएं पुरूष प्रधान समाज में पुरूषों के समान हक अधिकारों के मामले में समृद्ध तो हुए हैं पर यह बेहद दुखद ही कहा जाएगा कि आजादी के इन 75 साल से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पुरूष प्रधान समाज में पुरूष महिलाओं के प्रति अपनी ओछी व हीन मानसिकता पूरी तरह नहीं त्याग पाया है। आज भी समाज में लोग बेटियों की तुलना में बेटों को अधिक तवज्जो देते नजर आते हैं। शिक्षा प्रदान करने के मामले में भी बेटियों के साथ भेदभाव स्पष्ट नजर आता है। यह सब तब होता है जब इस देश बाबा साहब डा अंबेडकर के द्वारा लिखी समतामूलक मानवतावादी सोच पर आधारित भारतीय संविधान लागू है। सही मायने में देश का संपूर्ण विकास तभी संभव है जब यहां महिलाओं का विकास होगा। उक्त बातें शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बंदोरा में पदस्थ व्याख्याता केंवरा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पूर्व संध्या पर आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी देश में महिलाओं की स्थिति विषय पर अमृत संदेश समाचार पत्र से बातचीत में कही है। इस मौके पर व्याख्याता केवरा सिंह ने महिला उत्थान के क्षेत्र में बाबा साहब डा अंबेडकर के द्वारा किये अविस्मरणीय कार्यों को भी गिनाया जिनके बदौलत आज महिलाओं को संवैधानिक हक अधिकार मिले हुए हैं। जिनकी ही बदौलत महिलाओं के जीवन में सुधार आया है। बाबा साहब द्वारा महिला उत्थान के क्षेत्र में किए अविस्मरणीय कार्यों की बात करें तो उन्होने इसके लिए तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ खूब लड़ाई लड़ते हुए उन्हें हक अधिकार दिलाए है। इनमें नारी शिक्षा (महिलाओं को पढ़ने लिखने का अधिकार), मेटरनिटी लीव (गर्भवती कामकाजी महिलाओं की छुट्टी), लैंगिक समानता (महिला पुरुष में कोई भेदभाव नहीं), मताधिकार (महिलाओं को वोट देने का अधिकार), चालाक, संपत्ति व बच्चे गोद रैने का अधिकार, महिलाओं को संपत्ति का अधिकार, पुरूषों के समान महिलाओं को भी तालाक का अधिकार देना, बहुत विवाह की प्रथा समाप्त कर केवल एक विवाह का प्रावधान जो विधि सम्मत हो। आज पुरूष प्रधान भारतीय समाज में महिलाओं को हक अधिकार मिले हुए हैं वह सब बाबा साहब डा अंबेडकर के महिला उत्थान के लिए अथक संघर्षों का ही परिणाम है। व्याख्याता केवरा सिंह ने बाबा साहब डा अम्बेडकर द्वारा अपने पढ़ाई के दिनों में लिखी एक पत्र का जिक्र करते हुए बताया जिसमें उन्होंने लिखा था “बहुत जल्द भारत प्रगति की दिशा स्वयं तय करेगा लेकिन इस चुनौती को पूरा करने से पहले हमें भारतीय स्त्रियों की शिक्षा की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने होंगे ” बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर देश में महिला उत्थान के लिए कितने चिंतित थे यह बात उनके इस कथन से साबित होती है। आगे चलकर जब उनके कंधों पर जब देश के संविधान लिखने की जिम्मेदारी आई तो बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने महिलाओं को पुरुषों के समान जीवन के हर क्षेत्र में हक अधिकार प्रदान करें उसे कानूनी रूप प्रदान किया और महिला शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले तथा फातिमा शेख की परंपरा को आगे बढ़ाया। आज भारतीय संविधान लागू होने के बाद से भारतीय महिलाएं दुनिया भर में जीवन के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा पुरुष प्रधान समाज को मनवाया है। निश्चित ही हमें अपने मन मस्तिष्क में महिलाओं के प्रति आदर और सम्मान के भाव विकसित करने की आवश्यकता है। हमें यह भी सोचने की आवश्यकता है की देश का विकास सही मायने में तभी होगा हमारी महिलाएं शिक्षित होकर सशक्त और समृद्ध बनेंगी। गौरतलब हो कि नवीन जिला सक्ती अंतर्गत मालखरौदा व्लाक अंतर्गत मां अष्टभुजी की नगरी अड़मार निवासी व्याख्याता केंवरा सिंह अपने मूल निवासी समाज में महिलाओं व बेटियों की शिक्षाओं के लिए विशेष प्रयत्नशील रहती हैं। गरीब व जरूरतमंद बच्चों के पडढ़ाई लिखाई में भी हर संभव मदद करने के मामले में भी वे हमेशा आगे रहती हैं। उनके इसी कार्यों के लिए देश की प्रतिष्ठित संस्था भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा बीते साल दिसंबर 2022 में 38 वे राष्ट्रीय दलित साहित्यकार सम्मेलन के मंच से देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्र माता सावित्रीबाई फुले नेशनल फेलोशिप अवार्ड से सम्मानित भी की जा चुकी हैं।
