देवभोग :- रस्म की शुरूवात, तीन दिनों तक यज्ञ की धुनि जलेगी, फिर उससे निकले राख से खेली जाती है होली।इस बार गौ माता के साथ आम वृक्ष, गौरैया, चींटी आयोजन के अतिथि। किसी प्रदेश की यह इकलौती होली जन्हा गौ वंश व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जाहिर करने खेली जाती है होली। अलेख ब्रम्ह उपासक बाबा उदयनाथ द्वारा संचालित कांडसर स्थित गौ शाला में मनाए जाने वाली अनूठी ही नही प्रकृति प्रेम जगाने वाली होली कि शुरुवात 4 फरवरी को अतिथि सत्कार के साथ हो गई है। हालांकि फागुन की नवमी तिथि से गौ भ्रमण की शुरूवात हो जाति है। होलिका दहन के तीन दिन पूर्व शुरू होने वाले यज्ञ में भ्रमण कर लौटने वाली गाय अतिथि होती हैं, इनके साथ तीन और अतिथि का चयन होता है जिन्हें तीन दिवस तक मूख्य मंच पर विराजमान किया जाता है। इस बार की यह तीन अतिथि फलों के राजा आम वृक्ष, गौरेया पक्षी व चींटी को बनाया गया।आज इन 4 अतिथियों का भब्य स्वागत किया गया।स्वागत रैली व कलश यात्रा साथ साथ चल रहा था,प्रकृति प्रेम से जुड़ी 200 से भी ज्यादा माता बहने कलश यात्रा में शामिल हुई।अतिथियो के स्वागत में पूरे रास्ते भर नए कपड़े बिछाए गए थे।लगभग 2 किमी दूर से अतिथियो का स्वागत कर यज्ञ स्थल पर लाया गया। स्वागत की इस बेला को देखने प्रदेश के दुर्ग, रायपुर, महासमुंद, जशपुर समेत दूर दराज से भी श्रदालु जुटे हुए थे। निर्गुण ब्रम्ह उपासना पद्धति से होता है यज्ञ-बाबा उदय नाथ निर्गुण ब्रम्ह यानी शून्य के उपासक है। इस उपासना में प्रकृति प्रेम को श्रेष्ठ माना गया है।गौ सेवा, गौ के प्रति आस्था व प्रकृति प्रेम को बढ़ावा देने 2005 मे इस प्रकृति यज्ञ व धुनि की राख से होली खेलने की शुरुवात किया गया था, बाबा उदय नाथ बताते है कि शुरूवात में केवल उनके अनुयायी जिनकी सँख्या उस समय 2 हजार थी वही आते है।अब दूर दराज से लोगो की भीड़ व 7 हजार से भी ज्यादा अनुयायी यज्ञ में जुटेंगे। बाबा उदयनाथ ने बताया कि आज स्वागत के मूख्य मंच में देर रात तक भजन कीर्तन चलेगा। रविवार प्रातः काल सूर्योदय के साथ यज्ञ की शुरुवात होगी जो होलिका दहन के मुहूर्त पर खत्म होगी। हवन में कंडा व ओषधिय काष्ठ की आहुति दी जाती है।धुनि तीन दिनों तक अनवरत जलेगा। 7 को पूर्णाहुति व 8 होली के दिन सूबह इसी धुनि की राख से होली खेली जायेगी।तिलक लगाकर होली की बधाई देते है।राजधानी से होली पूर्व रस्म में शामिल होने पहूचे जागृति मण्डल के प्रदेश सचिव महावीर प्रसाद,भारतीय किसान संघ के संगठन मंत्री तुलाराम धीवर, गौ सेवक शांता राम जाल, महासमुंद जीप सदस्य अलका चन्द्राकर ने कहा कि ऐसे आयोजन से सनातन धर्म का प्रचार तो होता ही है, प्रकृति जो हमे सब कुछ देती है उसका भी हमे सम्मान करना चाहिए यही सीख मिलता है। गौ पग बाधा, दूर करती है रोग व्याधि- इस पूरे आयोजन में गौ पग बाधा बनने का रिवाज भी प्रमूख माना गया है। मान्यता है कि भ्रमण से लौट कर आने वाले गौ माता के रास्ते मे लेट कर जो व्यक्ति गौ पग बाधा बनते है, जिनके शरीर से गौ माता पार हो कर गुजरती है, उनकी शारीरिक कष्ट दूर हो जाता है।इसी मान्यता के चलते स्थानीय लोगो के अलावा दूर दराज से आए लोग गौ के रास्ते मे लेट जाते है। अब तक किसी भी श्रद्धालु को गौ चलने से नुकसान न होना इसकी सत्यता को भी प्रमाणित करता है।
