आबकारी विभाग की जांच में हुआ मामले का खुलाशा, एफआईआर दर्ज।
प्रमोद दुबे
महासमुंद – प्रीमियम अंग्रेजी शराब दुकान से 36 लाख गबन करने का मामला सामने आया है। आबकारी विभाग द्वारा निरीक्षण करने के बाद यह मामला उजागर हुआ है। सहायक जिला आबकारी अधिकारी दीपक ठाकुर की शिकायत पर सिटी कोतवाली ने 4 आरोपियों के खिलाफ धारा 316, 318 के तहत अपराध दर्ज किया है।थाना प्रभारी शरद दुबे ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी शीघ्र की जाएगी। अप्रैल 24 से लेकर अब तक आरोपियों ने 36 लाख 90 हजार 790 रुपए का गबन किया है। इस मामले में आर्डिंट टीम की भूमिका को भी संदिग्ध माना जा रहा है। हालाकि आरोपियों ने शातिर अंदाज में आर्डिट टीम को गुमराह कर रिपोर्ट कराते रहे। मिली जानकारी के अनुसार धोखाधड़ी और गबन के मामले में प्लेसमेंट एजेंसी ईगल हण्टर सोल्यूशन लिमिटेड के कर्मचारी मुख्य विक्रयकर्ता अमित राय, विकयकर्ता गौरी शंकर सेन, विक्रयकर्ता तुकेश दीवान एवं मल्टीपर्पस वर्कर लक्ष्मीनारायण साहू के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना में लिया है। विभाग द्वारा दुकान का निरीक्षण में पाया गया कि मदिरा स्कंध एवं दैनिक विक्रय पंजी, कैशबुक, परमिट फाईल, लायसेंस अद्यतन अवस्था में होना पाया गया। सभी उपस्थित कर्मचारी यूनिफार्म एवं आईडी कार्ड के साथ मदिरा दुकान संचालन करते पाए गए। निरीक्षण संग्रहित बैग्पाईपर व्हिस्की का भौतिक सत्यापन पंजी अनुसार प्रारंभिक स्कंध से किया गया। भौतिक सत्यापन पर बैग्पाईपर व्हिस्की की बिक्री स्कंध पंजी अवलोकन पर औसतन 1 पेटी का होना पाया गया परन्तु 14 दिसंबर एवं 15 दिसंबर को विक्रय शून्य होना पाया गया।
बैग्पाईपर व्हिस्की की स्कंध की दुकान में जांच करने पर विक्रयकर्ताओं के द्वारा गोलमोल जवाब दिया गया। जवाब संतोषप्रद न लगने पर सभी पेटियों को संग्रहित समस्त बोतलों को नग वार भौतिक सत्यापन करने जांच करने पर दैनिक मदिरा स्कंध पंजी में 373 नग व मदिरा दुकान में 136 नग बोतल का उपलब्ध होना पाया व 273 नग का अंतर परिलक्षित होना पाया गया। उक्त आधार पर मदिरा दुकान का भौतिक सत्यापन किया गया। भौतिक सत्यापन पश्चात् दुकान में उपलब्ध मदिरा स्कंध व पंजी अनुसार भिन्न्ता पाई गई। प्रत्येक पेटियों की सूक्ष्मता से जांच करने पर पेटियों को सीलबंद अवस्था में पाया गया,जिसके सीलटेप को फाड़कर नग वार मिलानकर दुकान में संग्रहित पेटियों में 12 नग के स्थान पर 5 नग, 4 नग, 3 नग रखा होना पाया गया। प्रत्येक ब्राण्ड लेबल की पेटियों की सूक्ष्मता से जांच करने पर मैकडावेल नं 1, रेड लेबल, टीर्चस 50, ब्लैक डाग, 100 पाईपर, सिंगनेचर रेयर, रायल चैलेन्ज, बैग्पाईपर, आफ्टर डार्क, ओकस्मिथ, रायल ग्रीन, रायल स्टैग, द वोल्फ्स्टोन ब्रांड में अत्यधिक कमी पाई गई। स्कंध पंजी अनुसार अन्य ब्राण्ड के मदिरा के स्कंध में भी कमी पाई गई। दुकान में संधारित दैनिक मदिरा हिसाब पंजी में मदिरा के प्रारंभिक स्कंध में भी अंतर पाया गया। परमिट अनुसार मदिरा का स्कंध मिलान पर व दैनिक मदिरा विक्रय की राशि व भौतिक सत्यापन में प्राप्त मदिरा स्कंध में आई कमी व दैनिक मदिरा विक्रय राशि में आई अचानक बढोत्तरी, स्टाक मिलान पर दैनिक मदिरा हिसाब पंजी अनुसार विक्रय राशि दिनांक 17.12.2024 की राशि 3902140(उनतालीस लाख दो हजार एक सौ चालिस) होना पाया गया। जबकि दुकान की वास्तविक बिक्री 211350 (दो लाख ग्यारह हजार तीन सौ पचास रूपये) होना पाया। जिसमें नगद विक्रय राशि 108850 व पीओएस मशीन से प्राप्त विक्रय राशि 102500 रू होना पाया। दुकान में उपलब्ध मदिरा का भौतिक सत्यापन करने पर व विक्रय की राशि का मिलान व परमिट का मिलान, ट्रांसफर परमिट का मिलान, परिवहन टूट. फुट का मिलान करने पर दुकान में 3690790 छत्तीस लाख नब्बे हजार सात सं नब्बे रू का अंतर परिलक्षित होना पाया। उत्त राशि गबन के संबंध में दुकान में उपस्थित कर्मचारियों विक्रयकर्ता गौरी शंकर सेन, विक्रयकर्ता तुकेश दीवान एवं मल्टीपर्पस वर्कर लक्ष्मीनारायण साहू से पूछताछ करने पर बताया गया कि सभी कर्मचारी उक्त कृत्य में सलिप्त रहे है व विक्रय राशि जो की दुकान से अधिक होता था। उसमें से कुछ हिस्सा रखकर, शेष राशि को दुकान की विक्रय राशि बनाकर बैंक में जमा किया जा रहा था। यह कार्य मदिरा दुकान में उपस्थित कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से मुख्य विक्रयकर्ता अमित राय के निर्देश पर किया जाना बताया गया।
