नरसिंहपुर-बद्री प्रसाद कौरव
नरसिंहपुर :- शिक्षक का एक अपना दर्जा होता है ऐसा नहीं की जो कोई भी आए और बजा कर चल दे। ना जॉइनिंग क्लियर न वेतन क्लियर और यहां तक कि जॉब भी क्लियर नहीं कब तक रहेंगे, रहेंगे भी कि नहीं रहेंगे कुछ भी क्लियर नहीं अतिथि शिक्षक शिक्षक ना हो करके एक मजबूर प्राणी है जो अपने जीवन यापन के लिए पढ़ा रहा है। बाकी ना उसकी स्कूल में कोई वैल्यू है और ना ही जहां वह पढ़ाता है वहां कोई वैल्यू है और जब किसी इंसान की उसके ही काम में वैल्यू ना हो तो वह कैसे वैल्युएबल शिक्षा दे सकता है पढ़ा लिखा होना एक तरफ है और पढ़ा लिखा होने के साथ वैल्यू होना एक तरफ है यदि पढ़ा लिखा व्यक्ति बिना वैल्यू के पड़ता है उसकी पढ़ाने का कोई अस्तित्व नहीं रहता और यदि पढ़ा लिखा व्यक्ति वैल्यू के साथ पढ़ता है उसके पढ़ाने का अस्तित्व है। हमारे देश में बोला जाता है कि हमारे देश में समानता का अधिकार है यह कैसी समानता है एक ही स्कूल में एक ही पद पर और यहां तक की सरकारी टीचरों से बेहतर और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के बावजूद भी वे ज्यादा सम्माननीय है, उनका वेतन ज्यादा है और अतिथि शिक्षक कम सम्माननीय और अपेक्षाकृत कम वेतन है यहां तक की सबको पता है की कौन कितना अच्छा पढ़ाता है लेकिन फिर भी सरकार सबके आंखों में धूल झोंकती है। मैं एक बात पर जोर देना चाहता हूं यदि अतिथि शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के योग्य नहीं था तो पिछले 20 सालों से पढ़ रहे बच्चों का भविष्य क्यों खराब किया गया उनके 20 बैच क्यों खराब किए गए क्यों वहां पर रेगुलर टीचर नहीं रखें गए एक साल दो साल तक ठीक था लेकिन 20-20 साल तक क्यों ऐसा किया गया और यदि अतिथि शिक्षक गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण के लिए योग्य था तो उसे आज तक रेगुलर क्यों नहीं किया गया। इसका मतलब तो यह हुआ या तो सरकार मध्य प्रदेश के छात्रों को 20 सालों से अयोग्य बना रही है या फिर 20 सालों से अतिथि शिक्षकों के नाम पर पैसा खा रही है क्योंकि हर एक व्यक्ति एक छोटी सी सुई से लेकर बड़ी से बड़ी चीज के क्रय में शिक्षा का कर (टैक्स) देता है ताकि उनके बच्चों को अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा मिल सके और उनके ही बच्चों को रोजगार भी मिल सके किंतु यहां सरकार उस कर (टैक्स) के पैसे में भी दलाली करती है। जहां एक सरकारी शिक्षक को औसतन एक माह में 50 हजार खर्चा आता है वही सरकार 50 हजार में 10 अतिथि शिक्षक को रख लेती है। इसका जवाब सरकार के पास क्यों नहीं है और यह निर्णय तत्कालीन सरकार का ही था कोई अलग से सरकार नहीं आई थी अतिथि शिक्षक को बनाने जब यह व्यवस्था चालू की गई तब भी बीजेपी थी और आज भी बीजेपी है आज करीबन 20 सालों से बीजेपी ने अतिथि शिक्षकों का दमन किया है और आगे भी करती जा रही है। इन 20 सालों में क्यों रेगुलर टीचर नहीं ले गए 20 साल कोई कम टाइम नहीं है किसी की आधी से ज्यादा जिंदगी बीत चुकी है 20 साल यानी दो दशक बीत गए। बस मध्य प्रदेश की सरकार से मैं यही प्रश्न करना चाहता हूं।
प्रश्न–जब अतिथि शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए योग्य नहीं थे तो उन्हें 20 सालो से लगातार क्यों रखा जा रहा था ? क्यों छात्रों कि भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया?
क्यों उनकी जगह योग्य शिक्षक को नहीं रखा गया? और यदि वे गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण कार्य के लिए योग्य थे तो आज तक उनका भविष्य क्यों सुरक्षित नहीं किया गया? क्यों अतिथि शिक्षक के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया ?
मात्र सरकार इन्हीं प्रश्नों का उत्तर दें?
