एक शहीद के अंत्येष्टि।

सुसक सुसक महतारी रोये, रोय ददा मुँह फार। आज तिरंगा ओढ़ आय हे, भारत के रखवार।। गाँव शहर सब कलपत हावय,रोवत तरिया पार। नता सबो सुसकै सुरता मा,धर-धर आँसू ढ़ार।। आज तिरंगा ओढ़ आय हे,..जिसमें कोन पढ़े आँसू के भाखा, नैनन नीर बहाय। नौं महिना जे रखे पेट मा,भाग अपन सहराय।। छूट डरे तैं कर्ज…

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