*पंचमी पर माता रानी का हुआ भव्य सोलह श्रृंगार*

मुकेश कश्यप@कुरुद:- जय माँ काली छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर कुरुद एवं वैष्णव देवी मंदिर कन्हारपुरी में पंचमी के शुभ अवसर पर माता रानी का भव्य सोलह श्रृंगार किया गया।
शनिवार सुबह काली मंदिर मंदिर पुजारी विकास शर्मा एवं वैष्णव देवी मंदिर पुजारी सौरभ शर्मा ने जगतजननी माता रानी का भव्य सोलह श्रृंगार किया।उन्होंने मनमोहक साज श्रृंगार साधनों से विधिपूर्वक शक्ति स्वरूपा को सजाया।साथ ही जनकल्याण व खुशहाली की कामना करते हुए माता रानी को इस संकट काल से जल्द ही निजात दिलाने की अर्जी लगाई।
विदित हो कि इस बार कोरोनाकाल के बढ़ते संक्रमण के चलते भक्तगणों का मंदिर में प्रवेश निषेध है ,उन्हे घर से ही माता रानी की पूजा अर्चना करने व जनकल्याण की कामना करने का सन्देश दिया गया है।
नवरात्रि में सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है। इस दिन मां को सोलह श्रृंगार चढ़ाया जाता है। दरअसल ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सुख और समृद्धि आती है और अखंड सौभाग्य का वरदान भी मिलता है।यही वजह है कि भारतीय संस्कृति में सोलह श्रृंगार को जीवन का अहम और अभिन्न अंग माना गया है।ऋग्वेद में भी सौभाग्य के लिए सोलह श्रृंगारों का महत्व बताया गया है.सोलह श्रृंगार में मौजूद हर एक श्रृंगार का अलग अर्थ है. बिन्दी को भगवान शंकर के तीसरे नेत्र से जोड़कर देखा जाता है। वहीं सिंदूर सौभाग्य और सुहाग की निशानी होती है।महावर और मेहंदी को प्रेम से जोड़कर देखा जाता है।काजल बुरी नजर से बचाता है।मां का सोलह श्रृंगार करने से घर और जीवन में सौभाग्य आता है।जीवन में खुशियां ही खुशियां आती हैं और जीवनसाथी का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
नवरात्रि का पांचवा दिन माता स्कंदमाता के पूजन से जुड़ा है,यह दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।भगवान स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।
