जिन्हें अपनी परवाह नहीं होती सिर्फ अपने बच्चों के खातिर अपना सारा जीवन न्योछावर कर देती हैं।मेरी माँ के लिए कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं-

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दुख,दर्द सह सदैव मुस्कुराती वह है मेरी माँ
हमें खिला खुद भूखा रह जाती वह है मेरी माँ
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माँ ईश्वर है,अनुभव है,ताकत है हम सब की
जग के सब संकटों से बचाती वह है मेरी माँ
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माँ है, बहन -बेटी है,बहू कितने इसके रूप
सभी रूप में प्यार बरसाती वह है मेरी माँ
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खुद तन-मन-धन सदैव लुटाती बच्चों की खातिर
इतना प्रेम अपने दिल में बसाती वह है मेरी माँ
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माँ ने मुझे पढ़ा लिखाकर अच्छा इंसान बनाया
मुझे सदा यहाँ सम्मान दिलाती वह है मेरी माँ
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– गौरव राठौर
जाँजगीर छ.ग.