क्या संदेश जाएगा आम जनता को?जब पत्रकार ही करेंगे आचार संहिता का उल्लंघन।

पत्रकार भवन को सील किए जाने का मामला।

सुरेन्द्र मिनोचा

मनेंद्रगढ़/एमसीबी :- दरअसल यह पूरा मामला चैनपुर स्थित पत्रकार भवन को सील किए जाने को लेकर है।जहां जिला प्रशासन द्वारा बुधवार की रात पत्रकार भवन के गेट पर ताला लगाकर उसे सीलबंद कर दिया गया।मामला संज्ञान में तब आया जब सोशल मीडिया पर भवन का सीलबंद फोटो वायरल हुआ। पूरा मामला क्या है। हम विस्तार से आपको अपनी खबर के माध्यम से सत्य से अवगत करा रहे हैं, गुरुवार सुबह लगभग 11:00 बजे एमसीबी- प्रेस क्लब के सदस्यों द्वारा वीडियो पोस्ट कर विरोध प्रदर्शन किया गया,मनेंद्रगढ़ में पत्रकार भवन को सील किया गया है,जिसको लेकर आज मनेंद्रगढ़ के पत्रकार इसे काला दिवस के रूप मनाएंगे। चुनाव आयोग किसके इशारे से काम कर रही है ? पत्रकारों ने भवन के सामने बैठ कर नारे लगाए। एमसीबी- कलेक्टर होश में आओ होश में आओ, तुम्हारी तानाशाही नहीं चलेगी नहीं चलेगी, पत्रकार एकता जिंदाबाद, हम अपना अधिकार मांगते नहीं किसी से भीख मांगते,प्रशासन की गुंडागर्दी नहीं चलेगी नहीं चलेगी। इस प्रकार के तमाम नारे पत्रकारों द्वारा लगाए गए।सोशल मीडिया में फर्जी पत्रकार बोलकर पत्रकारों को टारगेट कर रहे थे।जबकि सच्चाई तब सामने आई जब जिला प्रशासन के अधिकारी द्वारा पत्रकार भवन के गेट का ताला खोल दिया गया।

उपरोक्त संबंध में सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 27 मार्च को किसी अन्य राजनीतिक पार्टी द्वारा शिकायत किया गया था, जिसमें यह कहा गया कि पत्रकार भवन शासकीय भूमि पर है, वहां पर सुबह 28 मार्च को अन्य पार्टी की प्रेस वार्ता सुबह समय 9:30 बजे होने को है, जो कि आचार संहिता का सीधा-सीधा उल्लंघन है, इसलिए कुछ घंटे के लिए प्रेस वार्ता को टालने के लिए पत्रकार भवन गेट को सील कर दिया गया था।

एमसीबी- प्रेस क्लब के पत्रकारों द्वारा लिखित में आश्वासन देने पर कि कोई राजनीतिक पार्टी का आचार संहिता के दौरान पत्रकार भवन में प्रेस वार्ता नहीं होगा, प्रशासन के अधिकारी ने गेट का ताला खोला।

सवाल यह है क्या एमसीबी-प्रेस क्लब सोशल मीडिया में बने रहने के लिए अपनी झूठी वाहवाही लूटने का कार्य तो नहीं कर रही हैं? क्या धारा 144 ,आचार संहिता का उल्लंघन पत्रकारों ने नहीं किया है? क्या चुनाव आयोग को इस पर कार्रवाई नहीं करना चाहिए?

एमसीबी प्रेस क्लब के पदाधिकारी ने पत्रकार भवन में ताले में लगी सील को देखा और बैठ गए धरने पर!! क्या उन्होंने पहले किसी अधिकारी से बात किया? यदि अधिकारियों से बात करते तो इस समस्या का हल हो जाता कि ताला कितने समय खुलेगा, परंतु उन्होंने प्रोपेगेंडा कर दूसरों पर आरोप लगाते हुए हल्ला गुल्ला किया और आचार संहिता का उल्लंघन किया।क्या जिला प्रशासन आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज करेगा?