गांधी पुण्यतिथि पर आस्था की काव्य विनयांजलि।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद :- आस्था साहित्य महासमुंद द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पुण्य तिथि पर श्रीमती सरिता प्रमोद तिवारी त्रिमूर्ति कालोनो आवास पर काव्य विनयांजली दी गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में महासमुंद जिला चिकित्सालय में पदस्थ प्रसिद्ध चिकित्सक एवं साहित्यकार डॉ. कुलवंत सिंह आजमानी उपस्थित थे।

कार्यक्रम में अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार आनंद तिवारी पौराणिक ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार श्रीमती एस. चन्द्रसेन, डॉ. साधना कसार, डॉण् मंजू शर्मा उपस्थित थे। गांधी जी को काव्य विनयांजली अर्पित करते हुये बंधु राजेश्वर खरे ने कहा कि अनादर का अमृत विष है फिर तो पेड़े खाना क्यों एक फंसाना समर्पित की गई होंगे वे कोई और जो मेहमान बनकर किसी के घर जाना क्यों। नवोदित हस्ताक्षर सोमा चंद्राकर ने कहा कि अब क्योंकि नये जमाने के हैं हम हाथ में हमारे एक महान हथियार है। जो इस सदी का सबसे महानतम आविष्कार है। काव्य गोष्ठी को आगे बढ़ाते हुये साहित्यकार सरिता तिवारी ने पक्तियां समर्पित करते हुये कहा कि गांधी एक नाम नहीं इतिहास का पत्रा है, गांधी एक उम्मीद नहीं एक जीदकरते हुये कहा कि इन पथ भूलों को राह नई दिखा जाओ, संकट में है भारत बापू। एक बार फिर आ जाओ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. कुलवंत आजमानी द्वारा पंक्तियां समर्पित की गई. एक सी मिट्टी एक सी जरुरत, एक ही बगिया माली ने एक हो सीचा। वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती एस चन्द्रसेन एवं डॉ. साधना कसार द्वारा कार्यक्रम को ऊंचाईयां देते हुये पक्तियां के लिए आभार प्रदर्शित किया है। आस्था मर जाते हैं, हमने तो गांदी की तरह साहित्य की मौत को अमर कर देने की चाहत है। ओर से कार्यक्रम में संचालन करते हुये अन द साहित्यकार टेकराम सेन चमक ने तिवारी अपनी चमक बिखेरते हुये काव्य पौराणिक ने विनयांजली समर्पित करते हुये बापू बापू को को नमन किया. मकसद का आव्हान तकाजा है वक्त की आवाज है राहे आजादी में भरने का इक यही अंदाज है। साहित्यकार कमलेश पांडेय, डॉ. मंजू शर्मा, सुशील शर्मा ने अपनी चुनिंदा रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया इस अवसर पर आस्था साहित्य समिति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए साहित्य प्रेमी एवं कर्मचारी नेता प्रमोद तिवारी ने सभी की उपस्थिति दर्ज की।