क्या आला अधिकारी जागेंगे कुंभ करण की नींद से ?
ग्राम पंचायत कार्यालय में ताला लगाकर वहां से नदारत रहने वाले सचिवों पर कब होगी कार्यवाही?
सुरेन्द्र मिनोचा
एमसीबी :- छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद नई सरकार भाजपा के रूप में बनी। सरकार तो परिवर्तन हो गई लेकिन आज भी प्रशासनिक कसावट देखने को नहीं मिल रही है । जहां एक तरफ छत्तीसगढ़ की सरकार अनेकों योजनाएं संचालित कर रही है, जिससे आम जनता को उसका लाभ मिल सके। वहीं दूसरी तरफ कुछ अधिकारी कर्मचारी सरकार की योजनाओं पर पलीता लगाते नजर आ रहे हैं ।
अभी हाल ही में प्रधानमंत्री विकसित भारत रथ यात्रा के तहत योजनाओं की जानकारी शिविर लगा कर आम जन तक पहुंचाई गई, ताकि आम जनता योजनाओ से जुड सके और इसका लाभ प्राप्त करे।लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर समापन के बाद जस की तस ही स्थिति नजर आ रही है।हम बात कर रहे हैं एमसीबी जिला अंतर्गत जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ के ग्राम पंचायत कार्यालयों की जहां पर पंचायत सचिव शासन की योजनाओ पर पलीता लगाते नजर आ रहे हैं क्यों कि सचिव पंचायत कार्यालय को महीनों खोलते ही नहीं, जिससे ग्राम वासियों को छोटे छोटे कामों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।यदि ग्राम वासियों को शासन की योजनाओ का लाभ लेना हो तो उनके लिए लोहे के चने चबाने जैसी वाली बात हो जाती है। इसलिए आज भी कई पंचायतों के ग्रामीण शासन की योजनाओ से वंचित हैं, उनको शासन की योजनाओ के बारे में जानकारी ही नहीं होती है, जिसका पंचायतों के कार्यालयो में ताला लटका रहना बहुत बड़ा कारण है।
हमारे प्रतिनिधि द्वारा जब गुरुवार को चैनपुर से बिछिया टोला तक पंचायतों का दौरा किया तो अधिकतर ग्राम पंचायतों के कार्यालयो में ताला लटका मिला और जिन पंचायतों के कार्यालय खुले पाए गए उनमें सचिव नदारत पाए गए।
जिन पंचायतो के कार्यालयो में ताला लटकता हुआ दिखा उसमें घुटरा ग्राम पंचायत, ताराबहरा ग्राम पंचायत एवं बिछिया टोला ग्राम पंचायत कार्यालय शामिल हैं।
वही यह भी पता चला कि बिछिया टोला ग्राम पंचायत की स्थिति तो बद से बद्तर है, यहां तो पंचायत कार्यालय महीनों नहीं खुलता और न ही सचिव कभी पंचायत कार्यालय झांकने आता है, न ही रोजगार सहायक पंचायत में बैठता है।इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात पता चली कि बिछिया टोला पंचायत के ग्राम वासियों को काम कराने के लिए केल्हारी पंचायत बुलाया जाता है, ग्राम वासियों के कथन अनुसार बिछिया टोला पंचायत के सचिव केल्हारी पंचायत में मिलते हैं, ग्राम वासियों ने बताया कि जब कोई काम के लिए सचिव को फोन लगाते हैं तो वो फोन नही उठाते और यदि फोन उठा लेते हैं तो वो केल्हारी पंचायत में ही मिलने के लिए बुलाते हैं।
आखिर क्यों सचिव अपनी पंचायत छोड़ केल्हारी ग्राम पंचायत में बैठते हैं? क्या सचिव को अपनी पंचायत खोलते में तकलीफ़ होती है या फिर मामला कुछ और ही है ?
क्या आला अधिकारी ऐसे सचिवों पर कार्यवाही करेंगे जो अपनी ग्राम पंचायत के कार्यालय में ताला लगाकर वहां से गायब रहते हैं, जो शासन की योजनाओ से ग्राम वासियों को वंचित कर रहे हैं और ग्राम वासियों को अपनी पंचायत छोड़ केल्हारी पंचायत अपना काम करवाने जाना पड़ रहा है।वहां जाने के बाद भी ग्राम वासियों को अपने काम के लिए सचिव के आगे पीछे घूमना पड़ता है।
अब देखना यह है की उच्च अधिकारी ऐसे सचिवों पर कार्यवाही करते हैं या फिर पंचायत के ग्राम वासियों को परेशानियों की हालत पर छोड़ दिया जाता है?
इस संबंध में जब जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ के सी ई ओ से बात करने हेतू उन्हें फोन लगाया गया तो उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया।
