टिकटों का खेल खत्म होने के बाद चारों सीटों पर परंपरागत प्रतिद्वंदी भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले की तस्वीर दिखाई पड़ रही है।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद :- संसदीय सचिव व स्थानीय विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर की टिकट काटकर महासमुंद से कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर और विधायक सरायपाली किस्मतलाल नंद की टिकट काट कर वहां से चातुरी नंद को टिकट देकर दोनों नए चेहरों पर भरोसा किया है। काफी पहले से भाजपा की चारों ओर कांग्रेस की खल्लारी व बसना की टिकट फाइनल होने के बाद से महासमुंद सरायपाली की टिकट का लोग इंतजार कर रहे थे। टिकटों का खेल खत्म होने के बाद चारों सीटों पर परंपरागत प्रतिद्वंदी भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले की तस्वीर दिखाई पड़ रही है। लेकिन, आगे टिकट वितरण के बाद उपजी नाराजगी का सामना करने के लिए प्रत्याशी और उनकी पार्टी को तैयार रहना होगा। इसलिए, नाम वापसी की तिथि खत्म होने तक मुकाबला की तस्वीर पर थोड़ी बहुत धुंध तो रहेगी ही। सरायपाली में टिकट काटने के बाद विरोध के सुर उठने लगे हैं। विधायक किस्मतलाल नंद ने कल बड़ी बैठक बुलाई है। सर्वे में माइंस तथा जनता के बीच नाराजगी को लेकर महासमुंद सरायपाली की टिकट काटा जाना बताया जा रहा है आखिरकार, कांग्रेस ने मजबूत विकल्प के रूप में महिला प्रत्याशियों को महासमुंद से कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर सरायपाली से चातुरी नंद को मैदान में उतारा है। विधायकों को टिकट काटने के बाद विधायक समर्थकों में निराशा है जबकि नए प्रत्याशियों को टिकट मिलने पर जगह-जगह पटाखे जलाए। तथा उनका स्वागत किया गया। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने जिले में दो महिला प्रत्याशी उतारे हैं। महासमुंद विधानसभा से महिला प्रत्याशी को पहली बार विधानसभा का टिकट मिला है जबकि सरायपाली से 1990 में पहली बार कु. पुखराज सिंह को यह मौका मिला था। चारों सीटों पर दोनों प्रमुख दल भाजपा कांग्रेस से प्रत्याशियों के मैदान में आ जाने से मुकाबले की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। सभी सीटों पर अपवाद छोड़ दिया जाए तो भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला होता रहा है। महासमुंद में इस बार कांग्रेस प्रत्याशी डॉ रश्मि चंद्राकर और भाजपा प्रत्याशी योगेश्वर राजू सिंहा के बीच सब कुछ यथावत रहा तो सीधा मुकाबला होने जा रहा है दोनों नए चेहरे हैं 2018 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी विनोद चंद्राकर ने भाजपा प्रत्याशी पूनम चंद्राकर को पंचकोणीय संघर्ष में हराया था। कांग्रेस दशकों से इसे कुर्मी सीट मानती रही है। लिहाजा उसने इस बार फिर यही कार्ड खेला है। भाजपा की पूर्व में ऐसा प्रयोग कर चुकी है। इस बार उसने नया प्रयोग किया है। उधर खल्लारी में संसदीय सचिव व विधायक कांग्रेस प्रत्याशी द्वारकाधीश यादव और भाजपा प्रत्याशी अलका नरेश चंद्राकर के बीच सीधा मुकाबला होगा। 2018 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी  यादव ने भाजपा प्रत्याशी मोनिका दिलीप साहू का 56978 वोटो से हराया था। इसी तरह बसना में वन विकास निगम के अध्यक्ष व स्थानीय विधायक देवेंद्र बहादुर सिंह और भाजपा प्रत्याशी निलाचल सेवा समिति बसना के अध्यक्ष संपत अग्रवाल के बीच सीधा मुकाबला होगा। 2018 के चुनाव में कांग्रेस यहां से जीती थी। खास बात थी कि दूसरे नंबर पर 50027 वोटो के साथ निर्दलीय प्रत्याशी संपत अग्रवाल थे। जबकि भाजपा 36394 वोटो के साथ तीसरे नंबर पर थी। सरायपाली की बात कर तो कांग्रेस ने यहां से 52288 वोटो से जीत कर विधायक बने किस्मतलाल नंद की टिकट काटने का बड़ा निर्णय लेकर सबको चौका दिया है। उनके स्थान पर पार्टी ने इस बार एक शिक्षिका चातुरी नंद को मैदान में उतारा है‌ जबकि, भाजपा ने दो माह पहले ही यहां से भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष  सरला कोसरिया को टिकट दे दी थी। 2016 में कांग्रेस के किस्मत लाल नंद ने भाजपा के श्याम तांडी को बड़े अंतर से हराया था।